Karnataka Hijab Vivad: ‘ये चॉइस का मामला है, जबर्दस्ती नहीं’, हिजाब विवाद पर क्या बोले सहारनपुर के कॉलेज स्टूडेंट्स

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Karnataka Hijab Vivad: ‘ये चॉइस का मामला है, जबर्दस्ती नहीं’, हिजाब विवाद पर क्या बोले सहारनपुर के कॉलेज स्टूडेंट्स

राघवेंद्र शुक्ल/ योगेश भदौरिया, सहारनपुर
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 10 फरवरी को पहले चरण में चुनाव होना है। यहां के वोटरों का रुझान जानने के लिए हम इस्लामिया डिग्री कॉलेज के कुछ स्टूडेंट्स से बात कर रहे थे। इस बीच कर्नाटक में हिजाब को लेकर जारी विवाद पर भी बात चली। यहां के छात्र-छात्राओं ने इस पर अपनी राय जाहिर करते हुए हिजाब पहनने को चॉइस का मामला बताया है। उन्होंने राजनीतिक दलों पर धर्म की राजनीति का आरोप भी लगाया और कहा कि उन्होंने कॉलेज तक को नहीं छोड़ा और वहां भी धर्म की राजनीति फैला दी।

कॉलेज में ग्रेजुएशन अंतिम वर्ष की छात्रा फिजा से हिजाब को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा, ‘हिजाब तो बहुत जरूरी है। यह जिसको अच्छा लगे, वह लगाए। जिसकी इच्छा नहीं है, वह न लगाए।’ फिजा की बात में अपनी बात जोड़ते हुए इकरा कहती हैं, ‘हमारी तो पहचान ही हिजाब है।’ बीए थर्ड ईयर के ही छात्र मोहम्मद हारिस कहते हैं कि यह आजाद देश है। आप कुछ भी कर सकते हैं। हमारे दीन में, इस्लाम में पहले से जो चीजे हैं, उस पर आप क्यों हस्तक्षेप करते हैं? अगर कोई लड़की है, जिसका मन है हिजाब ओढ़ने का, आप उसको रोक रहे हो! यह गलत है। अगर किसी लड़की का हिजाब ओढ़ने का मन नहीं है, तो वह नहीं ओढ़ेगी। सबकी अपनी-अपनी राय है। जबर्दस्ती क्यों है?

फिजा आगे कहती हैं कि हिजाब लगाने के लिए उन्हें कोई पारिवारिक दबाव नहीं है। उनके लिए यह संस्कार का भी मामला नहीं है। उनका जब मन करता है, वह हिजाब लगाकर आ जाती हैं। जब मन नहीं करता तो नहीं लगातीं। उन पर इसे लगाने को लेकर कोई दबाव नहीं है। मोहम्मद शोएब कहते हैं कि हमारे इसलामिक राइट्स हैं। उसमें कोई दूसरा घुसने की कोशिश करे या फिर उसे एजुकेशन से जोड़ने की कोशिश करे, यह गलत है।

वह सरकार की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि हिंदुस्तान में हिंदू-मुस्लिम, इसाई सब रहते हैं। अगर आप सबके राइट्स को सुरक्षित नहीं रख सकते तो आप देश क्या चला रहे हो? आधुनिक समाज में क्या हिजाब या घूंघट जैसी चीजें होनी चाहिए या नहीं? इस सवाल के जवाब में हारिस और फिजा ने कहा कि यह सब लोगों की इच्छा पर होनी चाहिए। अगर उनकी इच्छा है, तो वह करें अन्यथा न करें। यह मर्जी की बात है।

हमने पूछा कि अगर किसी की इच्छा नहीं है तो क्या उसके लिए छूट है कि वह हिजाब न पहने? उस पर संस्कार का कोई दबाव तो नहीं है? इस पर जवाब देते हुए फिजा ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। हम आज ओढ़कर आए हैं, कल नहीं आएंगे। हमारी मर्जी है। हारिस कहते हैं कि हमारे दीन में हिजाब का जो मतलब है वह सुन्नत तरीके से है। वह अलग बात है। हमारे दीन में ऐसी बहुत सारी चीजें हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि किसी लड़की ने हिजाब ओढ़ लिया तो वह बहुत ठीक है। जिसने नहीं ओढ़ा तो वह बिल्कुल गलत है। ऐसा कुछ नहीं है।

सहारनपुर के नवभारत टाइम्स से जुड़े पत्रकार सैयद मशकूर बताते हैं कि हिजाब का इतिहास अरब देशों से जुड़ता है। वहां रेगिस्तान के नाते महिला और पुरुष दोनों के ही परिधान ऐसे हैं, जिसमें सारा शरीर ढका रहे। महिलाओं के अलावा वहां पुरुष भी हिजाब जैसी पोशाक सिर पर रखते हैं। बाद में इसे धार्मिक पहनावे के रूप में देखा जाने लगा।

बता दें कि कर्नाटक में हिजाब को लेकर जबर्दस्त विवाद छिड़ गया है। कई स्टूडेंट्स स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके विरोध में कई छात्र भगवा स्कॉर्फ पहनकर उनका विरोध कर रहे हैं। मामले को लेकर सियासत भी गरमा गई है।

हिजाब पर छात्राओं ने रखी अपनी बात



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