गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

विरोध प्रदर्शनों पर भाजपा नेता अन्नामलाई के तीखे सवाल, केंद्र और दिल्ली पुलिस की नीतियों पर जताई चिंता

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने लोकतंत्र में विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए अपनी ही केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी…

विरोध प्रदर्शनों पर भाजपा नेता अन्नामलाई के तीखे सवाल, केंद्र और दिल्ली पुलिस की नीतियों पर जताई चिंता
(फोटो: IANS)

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने लोकतंत्र में विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए अपनी ही केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने कहा कि किसी भी असहमति को सीधे 'राष्ट्रविरोधी' करार देना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है।

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अन्नामलाई ने 2011 की एक घटना को याद दिलाया, जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि उस समय श्री मोदी का रुख लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के पक्ष में था और वह सही था।

प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर चिंता

मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने दावा किया कि आज प्रदर्शन करने वालों को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है, उनके जमानती बांड खारिज हो जाते हैं और प्रक्रिया पर सवाल उठाने पर उन्हें कई तरह के आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में दिल्ली में सीजेपी (CJP) प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के तरीके पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे। अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि भले ही वह संगठन की सभी रणनीतियों से सहमत न हों, लेकिन हर समूह को अपने मुद्दों पर विरोध करने, बहस करने और प्रदर्शन करने का लोकतांत्रिक अधिकार है।

सरकार से पूछे गए सवाल

भाजपा नेता ने केंद्र सरकार से कई सीधे सवाल किए। उन्होंने पूछा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना से बाहर करने का फैसला कैसे लिया गया और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियों की समीक्षा क्यों नहीं की जाती। साथ ही, उन्होंने कुछ मामलों में जमानत प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों पर भी जवाब मांगा।

अन्नामलाई ने यह भी कहा कि हर असहमति को विदेशी ताकतों से प्रेरित बताना ठीक नहीं है, क्योंकि देश की एजेंसियां और सरकारी संस्थाएं पर्याप्त रूप से सक्षम हैं। उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा सीजेपी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की भी आलोचना की और कहा कि इससे विरोधी समूहों को अनावश्यक प्रचार मिल सकता है।

अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह आलोचनाओं का जवाब तथ्यों के आधार पर दे और राजनीतिक असहमति को राष्ट्रविरोध से जोड़ने से बचे।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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