JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने पर हाईकोर्ट में तीखी बहस, सरकार ने कहा 'सिस्टमैटिक फेलियर', कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल
झारखंड संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को लंबी सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार ने परीक्षा में 'सिस्टमैटिक फेलियर' और बड़े पैमाने पर…
झारखंड संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को लंबी सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार ने परीक्षा में 'सिस्टमैटिक फेलियर' और बड़े पैमाने पर धांधली का दावा किया, जबकि याचिकाकर्ताओं ने पूरी परीक्षा रद्द करने के औचित्य पर सवाल उठाए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में अब तक की जांच की एक सीलबंद रिपोर्ट पेश की। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने पक्ष रखते हुए कहा कि परीक्षा में व्यापक धांधली के तथ्य सामने आए हैं और जांच में इसकी पुष्टि हो रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक 28 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और यह संख्या और बढ़ सकती है।
जांच की धीमी गति पर अदालत की टिप्पणी
जब सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की जांच अभी जारी है, तो कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अगर जांच तीन साल तक चलेगी तो अदालत इंतजार नहीं करती रहेगी। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार खुद पूरी व्यवस्था में 'सिस्टमैटिक फेलियर' मान रही है, तो इस पहलू की गंभीरता से जांच किए बिना आगे कैसे बढ़ा जा सकता है?
कोर्ट ने सफल हुए करीब 2,700 अभ्यर्थियों के साथ न्याय की जरूरत पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार ने अपनी योग्यता के आधार पर नियुक्ति पाई है, तो उसे व्यापक अनियमितता के आधार पर प्रभावित करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलीलें दीं?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने दलील दी कि किसी भी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह मामला कुछ अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों की पहले से जानकारी होने से जुड़ा है। उनके अनुसार, नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न बताए गए थे, जिनमें से 10 सफल हुए। याचिकाकर्ताओं ने याद दिलाया कि हाईकोर्ट पहले ही इन 10 उम्मीदवारों के परिणाम रोकने का निर्देश दे चुका है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी की जांच दो साल से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ है। ऐसे में यह तय किए बिना कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष, पूरी परीक्षा को रद्द करना उचित नहीं है।
इनपुट: IANS



