जेएनयू के वाइस चांसलर तांत्रिक के शरण में ?

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लगातार विवादों में रहे जवाहरलाल यूनिवर्सिटी में कारगिल विजय दिवस के मौके पर जवानों को श्रद्धांजली दी गई, जिसमें केंद्र सरकार के दो मंत्रियों ने भी शिरकत किया। इस मौके पर बोलते हुए जेएनयू के वाइस चांसलर एम जगदीश कुमार ने कहा कि ‘जेएनयू में सेना द्वारा इस्तेमाल किया हुआ पूराना टैंक रखवाया जाए जिससे, छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना बढ़ेगी और उनको सेना के बलिदान को समझ पाएंगे।’

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सवाल-

टैंक देखते ही उमड़ पड़ेगी देशभक्ति?

लगता है, जेएनयू के वाइस चांसलर एम जगदीश कुमार को किसी तांत्रिक ने ये कह दिया है कि आग का गोला उगलने वाली पुरानी टैंक को अगर विश्वविद्धालयों में रखा जाए तो देशद्रोहियों में भी देशभक्ति की भावना उमड़ने लगती है। वैसे उन्हें तांत्रिक ने ये नहीं बताया होगा कि ऐसी बात करने से राजनीतिज्ञों को फायदा हो सकता है और शिक्षा और शिक्षालय को नुकसान।

क्या जेएनयू में छात्रों और शिक्षकों का एक धड़ा देशद्रोही है?

क्या जेएनयू में पढ़ने वाले लेफ्टविंग के छात्र देशद्रोही हैं, क्या वो देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं और क्या वो जेएनयू को देशद्रोहियों का अड्डा बनाना चाहते हैं? अगर हां तो सरकार कर क्या रही है? अभी तक सरकार उन छात्रों को ही नहीं ढूंढ पाई है जिन्होंने जेएनयू में देशद्रोही नारे लगाए थे।

 

 

देश को राष्ट्रभक्ति योजना की जरूरत?

नरेन्द्र मोदी सरकार बनने के बाद, देश में तथाकथित देशद्रोही जिस तरह से बढ़ते जा रहे हैं इस तरह से तो हमारी जनसंख्या कभी नहीं बढ़ी होगी! और मीडिया जिस तरह से इस पर चर्चा कर रही है, इससे तो यही लगता है कि जनसंख्या वृद्धि रोको, बेरोजगारी हटाओ और भ्रष्टाचार मिटाओ जैसे मुद्दों से ज्यादा जरूरी हो गई है, राष्ट्रभक्ति योजना की। अब, देखने वाली बात ये है कि क्या इस मुद्दे को सरकार गंभीरता से लेगी, क्या देशभक्ति योजना आएगा और क्या ये योजना सफल हो पाएगी।

हमें असली मुद्दों से भटकाया जाता है?

भले ही ये योजना ना आए और सफल ना हो लेकिन ऐसे बयानों से हमें देश में उत्पन्न मूल समस्याओं से भटकाने की योजना जरूर सफल हो जाती है, इसलिए जरूरत है हमें गुमराह नहीं होने की।

 

 

 

 

 

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