JNU यौन उत्पीड़न मामला: ABVP का आरोप — कांग्रेस-लेफ्ट आरोपी प्रोफेसर को बचाने के लिए भ्रम फैला रहे
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक प्रोफेसर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और लेफ्ट से जुड़े लोग आरोपी…
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक प्रोफेसर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और लेफ्ट से जुड़े लोग आरोपी प्रोफेसर को बचाने और मामले से ध्यान भटकाने के लिए भ्रामक सूचनाएं फैला रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, ABVP ने इस रवैये को निंदनीय बताया है और छात्राओं के लिए न्याय की मांग की है।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता छात्राओं की सुरक्षा, गरिमा और न्याय सुनिश्चित करना है। ABVP ने मांग की है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और इस प्रक्रिया में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप न हो। संगठन ने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।
जांच में देरी और ICC पर सवाल
इस मामले में JNU की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ABVP ने जांच में हुई करीब चार महीने की देरी का मुद्दा उठाया है। संगठन ने 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013' का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अनुसार जांच 90 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए और रिपोर्ट अगले 10 दिनों में प्रस्तुत की जानी चाहिए।
ABVP का दावा है कि जब उन्होंने जांच में देरी को लेकर आवाज़ उठाई और विरोध प्रदर्शन किया, तभी इस मामले में कार्रवाई में तेजी आई। उन्होंने अपनी मांगों में शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा देने और आरोपी को जांच प्रभावित करने से रोकने की बात भी कही थी।
"मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास"
ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, "कांग्रेस-लेफ्ट से जुड़े कुछ लोगों द्वारा इस गंभीर मामले में भ्रामक सूचनाएं फैलाकर ABVP को बदनाम करने और मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "छात्राओं की सुरक्षा और न्याय से बढ़कर कोई राजनीतिक हित नहीं हो सकता।" डॉ. सोलंकी ने दोहराया कि ABVP आरोपी को बचाने या न्याय के मूल प्रश्न से ध्यान भटकाने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध करेगी। संगठन ने मांग की है कि भ्रामक सूचनाएं फैलाकर न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने वालों की भी जांच की जाए।
इनपुट: IANS



