JNU में RSS के पथ संचलन पर राजनीतिक बहस, भाजपा ने सराहा, विपक्ष ने जताई चिंता
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित एक पथ संचलन ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस आयोजन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के…
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित एक पथ संचलन ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस आयोजन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे राष्ट्रवाद की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे शैक्षणिक माहौल के लिए खतरा करार दिया है।
यह पूरा मामला JNU में RSS के विजयादशमी उत्सव और पथ संचलन से जुड़ा है, जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
भाजपा ने बताया 'बदलते भारत' का संकेत
लखनऊ में भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने JNU में हुए इस कार्यक्रम का स्वागत करते हुए इसे एक "सकारात्मक और ऐतिहासिक संकेत" कहा। उन्होंने कहा, "यह बहुत अच्छी बात है कि राष्ट्रवादी संगठनों ने पहली बार ऐसी जगह पर पथ संचलन किया है, जहां कभी 'भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाल्लाह-इंशाल्लाह' जैसे देश विरोधी नारे लगाए जाते थे।" प्रकाश पाल ने आगे कहा कि जिस ज़मीन से देश को तोड़ने की बातें उठती थीं, आज वहां राष्ट्रवाद का संचलन हो रहा है, जो "बदलते भारत और बदलते जेएनयू का संकेत है।"
विपक्षी दलों ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने इस आयोजन की कड़ी आलोचना की है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी संरक्षण में कोई भी कार्यक्रम संभव है। उन्होंने कहा, "जब सरकार सुरक्षा देती है, तो हर तरह के कार्यक्रम होते हैं। इसलिए वे भी अपना कार्यक्रम कर रहे हैं। उन्हें हर जगह पुलिस और सरकार की सुरक्षा मिली हुई है। इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। सत्ता का साथ है तो मार्च तो निकलेगा ही।"
हैदराबाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव ने इस पथ संचलन को "खतरनाक" करार दिया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "पहले जेएनयू में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) संगठन काम करता था, अब वे सीधे आरएसएस के पथ संचलन और विजयादशमी उत्सव से जुड़ रहे हैं। यह वाकई बहुत खतरनाक स्थिति है।" राव ने आशंका जताई कि इससे कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह खराब हो जाएगी। उन्होंने कहा, "आरएसएस का मतलब ही कट्टरपंथी है। वे सिर्फ हिंदुओं को चाहते हैं, उन्हें मुसलमान, ईसाई या दूसरे समुदाय के लोग नहीं चाहिए।"
इनपुट: IANS



