झारखंड पुलिस में खाली पद और शिकायत प्राधिकरण पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा विस्तृत जवाब
झारखंड में पुलिस बल की स्थिति और पुलिस के खिलाफ शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी तलब की है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार…
झारखंड में पुलिस बल की स्थिति और पुलिस के खिलाफ शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी तलब की है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि पुलिस बल में कुल कितने पद स्वीकृत हैं और उनमें से कितने फिलहाल खाली हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह आदेश गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान दिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला राज्य में पुलिस शिकायत प्राधिकरण (Police Complaint Authority) के गठन को लेकर अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान में ली गई एक जनहित याचिका से जुड़ा है। इन प्राधिकरणों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मिलने वाली शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना है।
पुलिस शिकायत प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या राज्य और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरणों का गठन हो चुका है? यदि हां, तो क्या ये संस्थाएं वास्तव में काम कर रही हैं? इस पर राज्य सरकार ने बताया कि स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (SPCA) का गठन किया जा चुका है।
हालांकि, अदालत ने विशेष रूप से SPCA की कार्यप्रणाली की मौजूदा स्थिति और जिला स्तर पर ऐसे प्राधिकरणों के गठन पर विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत यह जानना चाहती है कि पुलिस के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई के लिए बनाई गई यह संस्थागत व्यवस्था कितनी प्रभावी और जवाबदेह है।
जनवरी 2027 में अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने सरकार को इन सभी बिंदुओं पर एक हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए जनवरी 2027 की तारीख निर्धारित की गई है। अदालत के इस कदम से राज्य में पुलिस सुधार और जवाबदेही की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
इनपुट: IANS



