सांसदों-विधायकों से जुड़े केस: धीमी जाँच पर झारखंड हाई कोर्ट की CBI को फटकार, पूछा- गवाह क्यों नहीं हो रहे पेश?
झारखंड में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर झारखंड हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने विशेषकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) समेत अन्य जाँच…
झारखंड में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर झारखंड हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने विशेषकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) समेत अन्य जाँच एजेंसियों की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ऐसे मामलों के निपटारे में तेजी नहीं लाई जा रही है।
बुधवार को न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने टिप्पणी की कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मुकदमों का ट्रायल लंबे समय से अटका हुआ है। अदालत के अनुसार, इन मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर होनी चाहिए ताकि उनका निपटारा बेवजह न टले। झारखंड में मौजूदा समय में सांसदों और विधायकों के खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले लंबित हैं।
जाँच एजेंसियों की सुस्ती पर सवाल
अदालत ने जाँच एजेंसियों की भूमिका पर कहा कि सिर्फ़ दस्तावेज़ जुटाने में ही काफी समय बर्बाद हो रहा है। इसके अलावा, गवाहों को समय पर अदालत में पेश करने में भी अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है, जिससे मुकदमों की सुनवाई पर सीधा असर पड़ रहा है और उनके निपटारे में देरी हो रही है।
इस पर CBI ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कुछ पुराने मामलों में गवाह अपने दिए गए पते पर नहीं मिल रहे हैं। एजेंसी ने इसे एक व्यावहारिक कठिनाई बताते हुए कहा कि इसी वजह से उन्हें अदालत में पेश कर गवाही दर्ज कराने में देरी हो रही है।
अदालत ने तलब किया रिकॉर्ड
मामलों की वास्तविक स्थिति और सुनवाई में देरी के कारणों का पता लगाने के लिए हाई कोर्ट ने दो प्रमुख मामलों का पूरा रिकॉर्ड संबंधित निचली अदालतों से तलब किया है। इस रिकॉर्ड के जरिए अदालत यह समझना चाहती है कि मुकदमों की सुनवाई अभी किस चरण में है और देरी के पीछे असल वजह क्या है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की अदालतों को जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का निपटारा तेजी से करने का निर्देश दिया हुआ है।
इनपुट: IANS



