झारखंड DGP नियुक्ति विवाद: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी नियमों के उल्लंघन को चुनौती
झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में एक अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि झारखंड…
झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में एक अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार ने DGP की नियुक्ति के लिए बनाए गए अपने 2025 के नियमों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होनी है।
केंद्र ने अपनी याचिका में झारखंड के ‘पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति नियम, 2025’ को चुनौती दी है। केंद्र का कहना है कि ये नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए कई निर्देशों का उल्लंघन करते हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य पुलिस प्रमुख की नियुक्ति में पारदर्शिता और स्थिरता लाना था।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मामला उठाया। केंद्र का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के 3 जुलाई 2018 के स्पष्ट निर्देश के बावजूद झारखंड ने नियमों का पालन नहीं किया। निर्देश के अनुसार, राज्यों को मौजूदा DGP के रिटायरमेंट से कम से कम तीन महीने पहले वरिष्ठ अधिकारियों के नामों की सूची संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजनी होती है, जो एक पैनल बनाकर वापस भेजता है और राज्य उसी में से नियुक्ति करता है।
केंद्र ने आरोप लगाया कि झारखंड ने न केवल 8 जनवरी 2025 को इन नियमों को अधिसूचित करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति नहीं ली, बल्कि इन नियमों के तहत की गई नियुक्तियों को भी गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की है।
विवादित नियुक्तियाँ और घटनाक्रम
केंद्र की अर्जी के मुताबिक, 2 फरवरी 2025 को आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता को दो साल के लिए DGP नियुक्त किया गया, जबकि उनका रिटायरमेंट 30 अप्रैल 2025 को, यानी तीन महीने से भी कम समय में होना था। गृह मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद झारखंड सरकार ने 6 नवंबर 2025 को गुप्ता के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को मंजूरी दे दी।
इसके बाद, 29 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार ने अपने नियमों में संशोधन कर DGP पद के लिए न्यूनतम छह महीने की सेवा अवधि की शर्त को ही हटा दिया। अगले ही दिन, 30 दिसंबर 2025 को, तदाशा मिश्रा को नया DGP नियुक्त किया गया, जो 31 दिसंबर 2025 को ही सेवानिवृत्त होने वाली थीं। केंद्र ने इस नियुक्ति पर भी कड़ी आपत्ति जताई और जनवरी 2026 में राज्य को नियम रद्द करने और प्रक्रिया फिर से शुरू करने को कहा था।
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से पूछा था कि UPSC को नियुक्ति के लिए प्रस्ताव क्यों नहीं भेजा गया। अब केंद्र की नई अर्जी ने इस मामले को फिर से अदालत के सामने ला दिया है।
इनपुट: IANS



