JPSC परीक्षा रद्द मामला: झारखंड हाईकोर्ट में सरकार और अभ्यर्थियों ने रखे अपने-अपने पक्ष, सोमवार को अगली सुनवाई
झारखंड में सिविल सेवा, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की भर्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को…
झारखंड में सिविल सेवा, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी ऑफिसर की भर्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में सरकार और याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों, दोनों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। सरकार ने परीक्षाओं में व्यापक अनियमितताओं को रद्द करने का आधार बताया, जबकि याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को असंवैधानिक और जल्दबाजी में लिया गया कदम करार दिया।
इस मामले में सिविल सेवा परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या 01/2024), फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती (विज्ञापन संख्या 18/2023), और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) भर्ती (विज्ञापन संख्या 21/2023) को रद्द करने के सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है।
सरकार ने क्यों किया फैसले का बचाव?
अदालत में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा गया कि जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का पता चला है और सीआईडी के दस्तावेजों से भी इनकी पुष्टि होती है। सरकार की दलील थी कि इन अनियमितताओं से परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में यह पता लगाना मुश्किल है कि सफल अभ्यर्थियों में कौन दोषी है और कौन निर्दोष, इसलिए नियुक्तियां रद्द करने का अधिकार उसके पास है।
याचिकाकर्ताओं ने फैसले पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स और इंद्रजीत सिन्हा ने सरकारी फैसले पर कई सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि अब तक इन परीक्षाओं के संबंध में न तो कोई प्राथमिकी दर्ज हुई है, न किसी अभ्यर्थी को समन भेजा गया है और न ही कोई गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने कहा कि सफल अभ्यर्थियों के मामले में पैसों के लेनदेन या किसी मनी ट्रेल का कोई सबूत भी सामने नहीं आया है।
वकीलों ने यह भी कहा कि सरकार ने एक आउटसोर्सिंग एजेंसी 'टीडीपीएल' की संभावित संलिप्तता के आधार पर परीक्षाएं रद्द की हैं, जबकि यह एजेंसी चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में, जुलाई 2025 में दस्तावेजों के सत्यापन के समय ही शामिल हुई थी। अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने नियुक्ति रद्द करने की सरकारी अधिसूचना को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि परीक्षा रद्द करने का अधिकार सिर्फ संबंधित आयोग (JPSC या JSSC) के पास है।
मामले में अब अगली सुनवाई सोमवार को दोपहर 2.15 बजे होगी, जिसमें हस्तक्षेपकर्ता की ओर से बहस की जाएगी।
इनपुट: IANS



