जमशेदपुर: DGP की बैठक के 9 घंटे बाद फायरिंग, बाबूलाल मरांडी ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
झारखंड के जमशेदपुर में पुलिस महानिदेशक (DGP) की अपराध-समीक्षा बैठक के कुछ ही घंटों बाद हुई गोलीबारी की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
झारखंड के जमशेदपुर में पुलिस महानिदेशक (DGP) की अपराध-समीक्षा बैठक के कुछ ही घंटों बाद हुई गोलीबारी की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है।
यह घटना जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र में हुई, जहाँ रंगदारी के लिए एक युवक पर चार से पाँच राउंड गोलियाँ चलाई गईं। जानकारी के अनुसार, युवक फोन पर बात कर रहा था, तभी कुछ बदमाश वहाँ पहुँचे, गोली चलाकर फरार हो गए। यह हमला DGP की उस उच्चस्तरीय बैठक के लगभग नौ घंटे बाद हुआ, जिसमें अपराध नियंत्रण और पुलिस की मुस्तैदी पर चर्चा की गई थी।
पुलिस की बैठकों पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पुलिस की शीर्ष स्तरीय बैठक के बाद भी अपराधी इस तरह खुलेआम गोलियां चला सकते हैं, तो आम जनता सुरक्षा को लेकर किस पर भरोसा करे। उन्होंने कहा, "इस घटना से यह सवाल उठता है कि पुलिस की बैठकों और निर्देशों का अपराधियों पर कितना असर हो रहा है।"
सरकार और पुलिस नेतृत्व पर निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि जमशेदपुर जैसे प्रमुख शहर में ऐसी घटना के बाद आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा कैसे कायम होगा। मरांडी ने DGP की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस व्यवस्था पर राजनीतिक प्रभाव दिख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में अपराधियों के बीच कानून का भय और आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा होना आवश्यक है।
उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि सरकारी बयान और बैठकें अपनी जगह हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपराध नियंत्रण में कोई अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है। मरांडी ने मांग की कि झारखंड की जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और एक सुरक्षित माहौल चाहिए।
इनपुट: IANS



