जम्मू-कश्मीर: आरक्षण फाइल LG ऑफिस में अटकी, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नौकरशाही पर साधा निशाना
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने उपराज्यपाल कार्यालय और नौकरशाही की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने आरोप लगाया है कि आरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण फाइल…
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने उपराज्यपाल कार्यालय और नौकरशाही की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने आरोप लगाया है कि आरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण फाइल उपराज्यपाल कार्यालय में अटकी हुई है, जबकि हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य पर बनी रिपोर्ट एक साल बाद भी सार्वजनिक नहीं की गई है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, डार ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश का मौजूदा मॉडल और नौकरशाही का प्रभाव सरकार के कामकाज में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
दो अहम मुद्दों पर देरी
इमरान नबी डार ने दो प्रमुख मुद्दों पर प्रशासन की विफलता को उजागर किया। उन्होंने बताया कि आरक्षण के मामले को हल करने के लिए बनाई गई एक उप-समिति ने निर्धारित छह महीने में अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंप दी थीं। डार के अनुसार, “जो सिफारिशें देनी थीं, वे संबंधित कार्यालयों में गईं। उसके बाद वहां से जो चिंताएं आईं, उन्हें हमने संबोधित करके वापस भेज दिया। अब दुर्भाग्यवश वह फाइल एलजी ऑफिस में पड़ी हुई है और लोग हमसे सवाल कर रहे हैं।” उन्होंने उपराज्यपाल से इस फाइल को जल्द मंजूरी देने की अपील की है।
दूसरा बड़ा मुद्दा दैनिक वेतनभोगियों का है, जो 20-25 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डार ने कहा कि मुख्य सचिव ने इस मामले पर रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय मांगा था, लेकिन अब लगभग एक साल बीत चुका है और रिपोर्ट सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा, “हम चीफ सेक्रेटरी से भी गुजारिश करते हैं कि उस रिपोर्ट को जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए और सिफारिशों के लिए उमर अब्दुल्ला की सरकार को भेजा जाए, ताकि जो हमने लोगों से वादे किए हैं, वे पूरे हो सकें।”
सरकार की उपलब्धियां और चुनौतियां
डार ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने कई महत्वपूर्ण काम किए हैं। उन्होंने राज्य का दर्जा बहाली के प्रस्ताव का जिक्र किया, जिसे भाजपा को छोड़कर सभी दलों का समर्थन मिला। इसके अलावा, फॉरेस्ट राइट्स एक्ट को लागू करना, दरबार मूव की व्यवस्था को वापस लाना और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को फिर से शुरू करना सरकार की उपलब्धियों में शामिल है।
उन्होंने यह भी बताया कि विधायकों का सीडीएफ डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर चार करोड़ किया गया और इसका उपयोग अब हृदय रोगियों या अग्निकांड पीड़ितों के लिए भी किया जा सकता है। इसके साथ ही, मैरिज असिस्टेंस को 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार किया गया और महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा को आगे बढ़ाया गया।
केंद्र सरकार पर सवाल
प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि गृह मंत्री से मुलाकात के एक साल बाद भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम का हिस्सा रहे 'बिजनेस रूल्स' को लागू नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल किया, “कहीं न कहीं ऐसा लग रहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को सजा दी जा रही है। मुझे नहीं पता कि हमारी खता क्या है। क्या हमारी खता यह है कि यहां जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस को बहुमत मिला? क्या हमारी खता यह है कि हम एक मुस्लिम बहुल राज्य हैं?”
इनपुट: IANS



