जम्मू-कश्मीर: नई होमस्टे नीति 2026 लागू, ग्रामीण और सीमावर्ती पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को पारंपरिक स्थलों से आगे बढ़ाकर दूर-दराज के ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मंत्रिपरिषद…
जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को पारंपरिक स्थलों से आगे बढ़ाकर दूर-दराज के ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने 'होमस्टे नीति, 2026' को अधिसूचित कर दिया है। इस नीति का लक्ष्य स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और पर्यटकों के लिए आवास के विकल्पों का विस्तार करना है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक पोस्ट में इस कदम को सतत पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। सरकार का मानना है कि इस नीति से पर्यटन का लाभ जम्मू-कश्मीर के सभी समुदायों तक पहुँचेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विरासत को बढ़ावा मिलेगा।
पंजीकरण प्रक्रिया और श्रेणियाँ
इस नई नीति के तहत, स्थानीय मकान मालिकों के लिए एक सरल और सुगम पंजीकरण ढाँचा तैयार किया गया है। अब वे अपने घरों को 'सिल्वर' और 'गोल्ड' श्रेणियों के तहत होमस्टे के रूप में आसानी से पंजीकृत करा सकेंगे। इससे न केवल पर्यटकों को जम्मू-कश्मीर की समृद्ध संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय परिवारों के लिए सतत आजीविका के अवसर भी पैदा होंगे।
नीति में यह भी प्रावधान है कि ऐसी आवासीय संपत्तियाँ, जिनका उपयोग परिवार स्वयं रहने के लिए नहीं कर रहे हैं, उन्हें 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' प्रतिष्ठानों के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है। यह कदम क्षेत्र में आतिथ्य के बुनियादी ढाँचे को और बढ़ावा देगा। पिछले कुछ वर्षों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण होटल और गेस्ट हाउस में जगह की कमी एक बड़ी चुनौती रही है, इस नीति से उस समस्या के समाधान में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



