ईरान की इज़रायल को दो टूक चेतावनी: नेतृत्व को धमकी दी तो मिलेगा जोरदार जवाब
ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता के खिलाफ इज़रायली रक्षा मंत्री की एक टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जोरदार पलटवार की चेतावनी दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची
ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता के खिलाफ इज़रायली रक्षा मंत्री की एक टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जोरदार पलटवार की चेतावनी दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ के बयान की निंदा की और कहा कि किसी भी खतरे का तुरंत और पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।
यह पूरा विवाद इज़रायली मंत्री इज़रायल काट्ज़ के एक बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की 'मौत' तय होने की बात कही थी। अराघची द्वारा साझा किए गए पोस्ट के मुताबिक, काट्ज़ ने यह भी कहा था कि इज़रायल ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा, "अगर वे किसी समझौते के जरिए ऐसा करते हैं, तो यह और भी अच्छा होगा।" इसके अलावा उन्होंने ईरानियों को 'अच्छा व्यापारी' बताया जो बातचीत में रियायतें हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
समझौते की शर्तों का दिया हवाला
इज़रायली मंत्री को जवाब देते हुए, ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) का जिक्र किया। उन्होंने 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) की शर्तें बिल्कुल साफ हैं और हर कोई उन्हें सार्वजनिक रूप से देख सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की ओर से यह वादा किया है कि वह तेल अवीव में अपने सहयोगियों को काबू में रखेंगे।"
अराघची ने आगे चेतावनी देते हुए लिखा, "अगर वे अपने प्रमुख की बात नहीं मानते, तो ईरान उन्हें सबक सिखाएगा। हमारे लोगों और हमारे नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह की धमकी का तुरंत और पूरी ताकत के साथ जवाब दिया जाएगा।"
दोहा में जारी है बातचीत
यह तनावपूर्ण बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर जारी है। बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में यह वार्ता हुई। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं मिल रहे हैं और बंद कमरे में हो रही बैठकों में मध्यस्थ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। इस बातचीत का मुख्य केंद्र 17 जून को हुए इस्लामाबाद एमओयू को लागू करना है, जिसमें ईरान की जब्त संपत्तियों और होर्मुज स्ट्रेट की समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
इनपुट: IANS



