रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ट्रंप की धमकी के बाद चर्चा में ईरान का 'पिकएक्स माउंटेन', क्यों है यह अमेरिका के लिए एक पहेली?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के एक अहम भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकएक्स माउंटेन' पर हमले की धमकी देकर वैश्विक स्तर पर अटकलों को तेज कर दिया है। फ्लोरिडा में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष…

ट्रंप की धमकी के बाद चर्चा में ईरान का 'पिकएक्स माउंटेन', क्यों है यह अमेरिका के लिए एक पहेली?
(फोटो: IANS)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के एक अहम भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकएक्स माउंटेन' पर हमले की धमकी देकर वैश्विक स्तर पर अटकलों को तेज कर दिया है। फ्लोरिडा में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत की सराहना करते हुए भी ट्रंप ने इस ठिकाने को निशाना बनाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के कुछ परमाणु ठिकानों से निपटना अभी बाकी है और पिकएक्स माउंटेन को बहुत तेजी से निशाना बनाया जा सकता है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ट्रंप की यह टिप्पणी ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी सैन्य रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े करती है। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस ठिकाने को लेकर तल्ख टिप्पणी की हो। उनकी इस धमकी के बाद यह पहाड़ी एक बार फिर सुर्खियों में है।

क्या है 'पिकएक्स माउंटेन' और कहाँ है?

यह ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित एक पहाड़ी इलाका है, जिसे स्थानीय तौर पर 'कूह-ए कोलांग गज ला' के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी में 'कोलांग' का अर्थ कुदाल या पहाड़ खोदने वाले औजार से जुड़ा है, जिस वजह से इसका नाम 'पिकएक्स माउंटेन' पड़ा। यह स्थान ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दूर और देश के प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान नतांज से करीब दो किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।

इसकी बनावट इसे क्यों बनाती है खास?

इस पहाड़ के भीतर गहरी सुरंगों का एक विशाल परिसर बनाया गया है, जिसके दो अलग-अलग प्रवेश मार्ग हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक सुरक्षा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये सुरंगें मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों के बीच खोदी गई हैं, जिससे इसे पारंपरिक हवाई हमलों से भेदना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह प्राकृतिक सुरक्षा ही इसे ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण संभावित ठिकाना बनाती है।

पश्चिमी देशों को क्या है चिंता?

पश्चिमी देशों और परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान इस भूमिगत सुविधा में यूरेनियम संवर्धन का एक ऐसा केंद्र विकसित कर रहा है, जो हवाई हमलों से सुरक्षित हो। यूरेनियम संवर्धन वह प्रक्रिया है जिससे परमाणु ईंधन या हथियार बनाए जा सकते हैं। अगर ईरान यहां अपने परमाणु कार्यक्रम को गोपनीय तरीके से जारी रखता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, ईरान हमेशा से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

अंदर क्या चल रहा है? स्थिति अभी अस्पष्ट

'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' के विशेषज्ञ उपग्रह तस्वीरों के जरिए इस जगह पर नजर बनाए हुए हैं। उनकी 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट बताती है कि सुरंगों के प्रवेश द्वारों पर मिट्टी के अवरोध अब भी मौजूद हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि वहां फिलहाल कोई नियमित परिचालन या बड़े पैमाने पर निर्माण नहीं हो रहा है। इसके बावजूद, रिपोर्ट में वहां महत्वपूर्ण उपकरण या सामग्री होने की संभावना जताई गई है।

इस दावे की पुष्टि नहीं: जुलाई में आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इजरायली खुफिया एजेंसियों के हवाले से कहा गया था कि ईरान ने यहां सेंट्रीफ्यूज और उनके पुर्जे पहुंचाए हैं, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इस परिसर का निरीक्षण नहीं किया है, जिससे अंदर की गतिविधियों की कोई स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है।

क्या अमेरिका इसे नष्ट कर सकता है?

अमेरिका के पास GBU-57 जैसे शक्तिशाली 'बंकर बस्टर' बम हैं, जो जमीन के नीचे गहरे ठिकानों को तबाह करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पिकएक्स माउंटेन की गहराई और चट्टानी बनावट के कारण इसे पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं होगा। अमेरिकी हमले से इसके प्रवेश द्वार, बिजली और वेंटिलेशन सिस्टम को तो नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन यह निश्चित नहीं है कि पहाड़ के भीतर मौजूद सभी केंद्र नष्ट हो जाएंगे। अमेरिका के लिए चुनौती सिर्फ ठिकाने को तबाह करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वहां मौजूद कोई भी परमाणु सामग्री दोबारा इस्तेमाल के लायक न बचे।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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