ईरान का कड़ा इंतकाम, US दूतावास और बगदाद एयरबेस पर ईरान ने दागे रॉकेट

ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी के खात्मे के बाद से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. एक तरफ जहां जनरल कासिम सुलेमानी को लेकर लोखों लोगों की आखों में नमी है, तो वहीं दूसरी और ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती दूरीया भी सामने आ रही है. जिसके बाद बीते देर रात बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर ताबडतो़ड़ राकेट दागे गए ना केवल दूतावास बल्कि अमेरिकी फौजी बेस पर भी हमला किया गया. हालांकि इस हमले में किसी के मारे जाने की खबर नहीं है, लेकिन इसे कासिम सुलेमानी पर हमले से जोड़कर देखा जा रहा है.

ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी को एयर स्ट्राइक में मारने के बाद अमेरिका युद्ध के कगार पर खड़ा है. तो ईरान की तरफ से ‘कड़ा इंतकाम’ लेने का प्रण लिया गया है. वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कह दिया है कि ‘कुछ भी किया तो तबाह कर देंगे.’ इस पूरे संघर्ष के बीच इराक ने अमेरिकी सेना को अपनी धरती से बाहर करने का फैसला लिया है, अब हैरान कर देने वाली जानकारी तो ये सामने आई है कि पहले अमेरिकी सेना ने इराक छोड़ने के लिए कहा और बाद में कहा गया कि ये लेटर गलती से लिखा गया.

दरअसल, शुक्रवार को अमेरिका ने हवाई हमला कर ईरानी की सेना के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराया. जिस वक्त सुलेमानी पर हमला किया गया था वे इराक एयरपोर्ट पर थे. सुलेमानी की मौत को ईरान ने गंभीरता से लिया ही, इसी के साथ इराक ने भी अमेरिका के इस एकशन की आलोचना की है. केवल इतना ही नहीं रविवार को इराक की संसद में अमेरिकी सेना को अपनी जमीन से बाहर करने के लिए प्रस्ताव भी पास किया है.

इराकी संसद में ये प्रस्ताव पास होने के बाद जानकारी आई कि अमेरिकी सेना की इराक टास्क फोर्स के ब्रिगेडियर जनरल विलियम सिली ने रविवार को इराकी सेना को एक पत्र लिखा. जिस पत्र में ब्रिगेडियर विलियम ने बताया कि अमेरिकी सेना इराक से जाने के लिए तैयार है. इराक में अमेरिकी सेना टास्क फोर्स के इंचार्ज के लेटर में भले ही इराक छोड़ने की बात कही गई हो, लेकिन वॉशिंगटन की तरफ से जो बयान आया जिसमें इसे गलती बताया गया.

वहीं रविवार को जब इराकी संसद में विदेशी सैनिकों को इराक की धरती से बाहर भेजने का प्रस्ताव पास किया गया, तो इराक के प्रधानमंत्री अब्दुल अल महदी ने साफ कहा कि उनके पास दो विकल्प थे, या तो वह सेना को बाहर करने का फैसला ले या फिर उन्हें सिर्फ ट्रेनिंग तक ही सिमित रखे. महदी ने कहा है कि मैंने दो विकल्प होने के बावजूद पहला विकल्प चुना है, जो विदेशी सैनिकों को इराक की धरती से बाहर भेजने वाला है. इराकी सरकार ने ये भी कहा कि अब ISIS का वजूद खत्म हो चुका है, ऐसे में अमेरिकी सैनिकों की वहां आवश्यकता नहीं है.

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ऐसे में अब भी सबकी नजर इस बात पर है कि इराक की संसद में जो फैसला किया गया है, उस पर अमल कैसे और कब तक होगा.