सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कमजोर वैश्विक रुख से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निवेशकों को सता रही विदेशी कारकों की चिंता

कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) की बिकवाली के दबाव में भारतीय शेयर बाजारों ने सोमवार को गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। सुबह के सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख…

कमजोर वैश्विक रुख से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निवेशकों को सता रही विदेशी कारकों की चिंता
(फोटो: IANS)

कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) की बिकवाली के दबाव में भारतीय शेयर बाजारों ने सोमवार को गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। सुबह के सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जिसका असर बैंकिंग और रियल्टी शेयरों पर खास तौर पर देखा गया।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 9:17 बजे बीएसई का सेंसेक्स 526.96 अंक (0.71%) गिरकर 73,368.78 पर और एनएसई का निफ्टी 174.20 अंक (0.75%) फिसलकर 22,966.30 पर आ गया था। बाजार की इस कमजोरी के पीछे विशेषज्ञों ने बाहरी कारकों को ज्यादा जिम्मेदार ठहराया है, जो घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भारी पड़ रहे हैं।

सभी सेक्टरों में बिकवाली का दबाव

सोमवार को बाजार में चौतरफा गिरावट का माहौल रहा। फाइनेंशियल और रियल्टी स्टॉक्स शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा टूटे। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सूचकांकों में करीब 1% की कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी मेटल, PSU बैंक, रियल्टी, FMCG, और ऑयल एंड गैस समेत लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में थे। यह गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों (लार्जकैप) तक सीमित नहीं थी, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी इसका असर दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 624 अंक (1.03%) गिरकर 60,267 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 214 अंक (1.09%) की कमजोरी के साथ 19,500 पर कारोबार कर रहा था।

बाजार पर क्यों बना हुआ है दबाव?

बाजार जानकारों का कहना है कि अर्थव्यवस्था के मजबूत रहने और कंपनियों की कमाई बढ़ने के बावजूद बाजार में गिरावट चिंता का विषय है। इसके पीछे दो बड़े वैश्विक कारण हैं। पहला, ब्रेंट क्रूड की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना और दूसरा, अमेरिका में 10-साल के बॉन्ड यील्ड का 5.2% पर होना। इन वजहों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जुलाई और अगस्त में खरीदार रहने के बाद FPI सितंबर में फिर से बिकवाल बन गए हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना रहने की आशंका है।

एशियाई बाजारों का हाल

सोमवार को अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख था। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, सियोल और जकार्ता के बाजार लाल निशान में थे, जबकि केवल हांगकांग में बढ़त देखी गई। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार तेजी के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स में 0.93% और नैस्डैक में 0.48% की मजबूती दर्ज की गई थी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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