शेयर बाजार में लगातार सातवें दिन गिरावट, सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा लुढ़का
कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख क्षेत्रों में बिकवाली के दबाव के चलते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। बुधवार को कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का…
कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख क्षेत्रों में बिकवाली के दबाव के चलते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। बुधवार को कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 800 से ज्यादा अंक टूट गया, जबकि निफ्टी भी एक प्रतिशत के करीब नीचे आ गया।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार पर कई नकारात्मक कारकों का असर देखने को मिला। इनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले का इंतजार शामिल है, जिसके चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
बाजार की चाल और प्रमुख आंकड़े
बुधवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 345.23 अंकों की गिरावट के साथ 73,253.44 पर खुला। दिन के कारोबार में यह 826.19 अंक (1.12%) तक फिसलकर 72,772.48 के निचले स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह, निफ्टी 50 की शुरुआत 71.75 अंक की गिरावट के साथ 22,678.00 पर हुई और यह दिन में 209.05 अंक (0.91%) गिरकर 22,540.70 के न्यूनतम स्तर पर आ गया। बैंक निफ्टी सूचकांक भी 181.65 अंक कमजोर होकर 53,793.25 पर खुला।
सेक्टरों का हाल: IT और FMCG में भारी बिकवाली
बाजार में बिकवाली का सबसे ज्यादा असर आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर पड़ा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.2 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.63 प्रतिशत लुढ़क गया। लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। एकमात्र निफ्टी ऑटो में 0.36 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई। व्यापक बाजारों की बात करें तो निफ्टी मिडकैप 100 में 0.41 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
बाजार पर बाहरी बाजारों का असर
हालांकि, एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिले थे। चीन का शंघाई और शेन्ज़ेन इंडेक्स क्रमशः 0.87% और 2.19% ऊपर रहे। वहीं, जापान का निक्केई 1.26% और हांगकांग का हैंग सेंग 0.38% चढ़ा। इससे पहले अमेरिकी बाजार भी हरे निशान में बंद हुए थे, जहाँ नैस्डैक में 1.18% की तेजी आई थी। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक अब अमेरिकी फेड के फैसलों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर बनाए रखेंगे, जो बाजार की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।
इनपुट: IANS



