India vs China: चीन की आफत भारत के लिए राहत! ड्रैगन के कारण महंगाई होने वाली है छूमंतर, जानिए कैसे

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India vs China: चीन की आफत भारत के लिए राहत! ड्रैगन के कारण महंगाई होने वाली है छूमंतर, जानिए कैसे

India vs China: चीन की आफत भारत के लिए राहत! ड्रैगन के कारण महंगाई होने वाली है छूमंतर, जानिए कैसे

नई दिल्ली: मॉनसून (Monsoon) पर अल नीनो (El Nino) के असर के कारण आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन पड़ोसी देश चीन से भारत के लिए अच्छी खबर आई है। चीन की इकॉनमी अभी संघर्ष कर रही है और वहां की करेंसी युआन के मुकाबले रुपया काफी मजबूत हुआ है। इस कारण चीन से आयात सस्ता हुआ है। 31 मार्च से 30 जून के बीच युआन के मुकाबले रुपया छह परसेंट मजबूत हुआ है। चीन की इकॉनमी कोरोना काल के बाद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है और इससे ग्लोबल इकॉनमी की संभावनाएं भी क्षीण हुई है। लेकिन चीन की इस स्थिति से भारत को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि अभी दोनों देशों के बीच ट्रेड बैलेंस पूरी तरह चीन के पक्ष में है। मगर युआन के कमजोर होने से भारत को जबरदस्त फायदा होगा। पिछले फाइनेंशियल ईयर में चीन के साथ भारत का ट्रेड गैप 83.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया था जो फाइनेंशियल ईयर 2022 में 72.91 अरब डॉलर था। पिछले साल भारत से चीन को निर्यात में 28 फीसदी गिरावट आई और यह 15.32 अरब डॉलर रह गया था जबकि आयात 4.16 परसेंट बढ़कर 98.51 अरब डॉलर पहुंच गया।

इस फाइनेंशियल ईयर में भी चीन से आयात लगातार बढ़ रहा है। जनवरी से अप्रैल के दौरान यह 4.6 परसेंट बढ़कर 37.86 अरब डॉलर पहुंच गया। अमेरिका के बाद चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। जेपी मॉर्गन में हेड ऑफ एमर्जिंग मार्केट इकनॉमिक्स जहांगीर अजीज ने कहा कि चीन नॉन-एनर्जी इम्पोर्ट में हमारा सबसे बड़ा सोर्स है। युआन की तुलना में रुपये के मजबूत होने से हमें वहां से आयात करना सस्ता पड़ेगा। इससे भारत में महंगाई कम होगी क्योंकि चीन से आयात किया जाने वाला सामान सस्ता होगा। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के साउथ एशिया इकॉनमिक रिसर्च के हेड अनुभूति सहाय ने कहा कि युआन की कमजोरी का मतलब है कि चीन दुनिया के बाकी देशों को सस्ते में सामान एक्सपोर्ट कर रहा है। इससे भारत को काफी फायदा होगा क्योंकि खासकर केमिकल आदि के क्षेत्र में चीन हमारा अहम साझेदार है।

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युआन की गिरावट

जानकारों का कहना है कि देश में महंगाई मोटे तौर पर मॉनसून की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर अल नीनो के कारण मॉनसून पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है तो युआन की कमजोरी भारत के लिए सोने पर सुहागा होगी। सहाय ने कहा कि अगले कुछ तिमाहियों में भारत के लिए मॉनसून सबसे ज्यादा अहम है। देश में कोर इंफ्लेशन काबू में है और तत्काल जिंस की कीमतों में भारी तेजी का अनुमान नहीं है। ऐसे में युआन की तुलना में रुपये का मजबूत होना भारत के लिए अच्छी खबर है। युआन की कमजोरी के कई कारण हैं। कोरोना महामारी के बाद चीन की इकॉनमी संघर्ष कर रही है जबकि अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद रिटर्न बढ़ गया है। ग्लोबल इकॉनमी में सुस्ती के कारण चीन की एक्सपोर्ट गिरा है।

पिछले महीने डॉलर की तुलना में युआन छह महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था। बार्कलेज में सीनियर रीजनल इकनॉमिस्ट राहुल बाजोरिया ने कहा कि युआन की कमजोरी भारत के लिए वरदान हो सकती है। इससे हमें महंगाई कम करने में मदद मिल सकती है। रुपये में उतारचढ़ाव को रोकने के लिए आरबीआई ने जो कदम उठाए हैं, उससे भी रुपये को काफी मदद मिली है। अगर युआन में डॉलर के मुकाबले गिरावट जारी रही तो इससे रुपया मजबूत होगा। इस साल डॉलर के मुकाबले रुपये में 0.8 परसेंट गिरावट आई है जबकि पिछले साल इसमें 10 परसेंट गिरावट आई थी। जानकारों का कहना है कि हाल के महीनों में इक्विटी में भारी विदेशी निवेश आया है। ऐसी स्थिति में आरबीआई डॉलर खरीदकर अपना खजाना भरने में लगा है और उसने रुपये की उड़ान को थामकर रखा है।

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