भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: 5 साल का लक्ष्य ढाई साल में होगा पूरा?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर विशेषज्ञ काफी आशान्वित हैं। उनका मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जिसका लक्ष्य कुछ…
भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर विशेषज्ञ काफी आशान्वित हैं। उनका मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जिसका लक्ष्य कुछ ही वर्षों में हासिल किया जा सकता है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साझेदारी से न केवल व्यापारिक आंकड़े बेहतर होंगे, बल्कि रोजगार और निवेश के मोर्चे पर भी बड़ी कामयाबी मिलेगी।
बीआरआईएसईसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन हरवंश चावला ने इस समझौते पर अपनी राय रखते हुए कहा कि इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर लंबे समय में बेहद सकारात्मक होगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके नतीजे दिखने में छह महीने से एक साल का वक्त लग सकता है।
व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
चावला ने मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया, "वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच सालाना व्यापार लगभग 2.8 अरब डॉलर का है।" उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इसे अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह लक्ष्य बहुत पहले हासिल हो सकता है। उनके मुताबिक, "यह लक्ष्य पांच साल नहीं, बल्कि दो से ढाई वर्षों में ही हासिल किया जा सकता है।"
वैश्विक चुनौतियां और समाधान
इस व्यापारिक रिश्ते की राह में सबसे बड़ी बाधा मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता, खासकर पश्चिम एशिया का संकट है। हरवंश चावला ने चेताया कि मध्य-पूर्व के तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कमोडिटी की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। इससे कच्चे माल की लागत बढ़ रही है और आपूर्ति में देरी हो रही है। उन्होंने कहा, "कई बार ऑर्डर मिलने से लेकर उसकी डिलीवरी तक कीमतों में बड़ा अंतर आ जाता है, जिसे व्यापारियों को ध्यान में रखना होगा।" इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने सरकार से निर्यातकों के लिए सस्ती ब्याज दरों और लचीली बैंकिंग सुविधाओं वाली वित्तीय योजनाएं लाने की मांग की।
रोजगार और निवेश पर असर
चावला ने इस धारणा को खारिज किया कि एफटीए से रोजगार घटता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब व्यापार दोगुना होगा तो इसका सीधा फायदा रोजगार सृजन के रूप में दिखेगा। उन्होंने कहा, "यदि किसी कंपनी का कारोबार 100 करोड़ रुपए से बढ़कर 125 करोड़ रुपए होता है, तो उसका लाभ केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार और समग्र आर्थिक गतिविधियों में भी दिखाई देगा।" उनके अनुसार, व्यापार विस्तार से रोजगार और निवेश दोनों में बढ़ोतरी की पूरी संभावना है।
इनपुट: IANS



