भारत-EFTA व्यापार समझौता: निवेश और रिश्तों को मिलेगी नई मज़बूती, स्विस अधिकारी ने बताईं बड़ी बातें
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुआ व्यापार एवं निवेश समझौता दोनों पक्षों के लिए एक मज़बूत नींव का काम करेगा, जिससे न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा बल्कि रिश्ते भी गहरे होंगे। समाचार एजेंसी IANS…
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुआ व्यापार एवं निवेश समझौता दोनों पक्षों के लिए एक मज़बूत नींव का काम करेगा, जिससे न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा बल्कि रिश्ते भी गहरे होंगे। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में EFTA के उप महासचिव (डिप्टी सेक्रेटरी जनरल) मार्कस श्लागेनहाउफ ने इस समझौते को अपनी तरह का पहला बताया, जिसमें निवेश की एक अभूतपूर्व प्रतिबद्धता शामिल की गई है।
श्लागेनहाउफ, जो स्विट्जरलैंड के ट्रेड रिलेशंस डिवीजन के निदेशक भी हैं, ने इस समझौते को सिर्फ़ एक व्यापारिक চুক্তি न मानकर दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक सहयोग का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह ख़ास तौर पर भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने में बेहद अहम साबित होगा।
व्यापार के बाद निवेश की बारी
इस समझौते के असर को समझाते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक अनुभव यही बताता है कि जब भी दो देशों के बीच वरीयता प्राप्त व्यापार व्यवस्था (Preferential Trade Arrangement) लागू होती है, तो आपसी व्यापार में बढ़ोतरी होती है। उनके मुताबिक, "जब कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलती है, तो व्यापारिक गतिविधियां तेज होती हैं और उसके बाद निवेश का प्रवाह भी बढ़ने लगता है। भारत-ईएफटीए समझौते से भी यही प्रक्रिया देखने को मिलेगी और आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।"
भारत-EFTA समृद्धि शिखर सम्मेलन
बुधवार को मार्कस श्लागेनहाउफ ने भारत-EFTA समृद्धि शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह दूसरा शिखर सम्मेलन है, जिसका मुख्य उद्देश्य समझौते के लागू होने की पहली वर्षगांठ का आकलन करना है। इस सम्मेलन में EFTA देशों की 200 से ज़्यादा कंपनियाँ हिस्सा ले रही हैं। उनका मकसद समझौते के बाद बने हालात का जायजा लेना और निवेश व व्यापार के नए अवसरों की पहचान करना है।
उन्होंने आगे कहा कि यह समय दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं की समीक्षा का है। एक ओर जहाँ EFTA देश निवेश को प्रोत्साहित कर रहे हैं, वहीं भारत भी निवेशकों के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। श्लागेनहाउफ के अनुसार, निवेश तभी बढ़ सकता है जब नीतिगत और नियामकीय ढाँचा निवेशकों के पक्ष में हो, और दोनों पक्ष इसी दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



