‘इंडिया’ ब्लॉक की CJI से मिलने की मांग ‘सरासर मूर्खता’: हरीश साल्वे
देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और जाने-माने वकील हरीश साल्वे ने ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं की भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मिलने की कोशिश को 'सरासर मूर्खता' बताया है। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट…
देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और जाने-माने वकील हरीश साल्वे ने ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं की भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मिलने की कोशिश को 'सरासर मूर्खता' बताया है। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट को 'राजनीति का मोहरा' बनाने का एक प्रयास है।
समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में साल्वे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा CJI से मिलने का समय मांगने और फिर CJI द्वारा इससे इनकार किए जाने की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "सबसे पहले मुझे लगा कि नेताओं ने मिलने का समय मांगा है, यह खबर फर्जी है।"
न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल
हरीश साल्वे ने इस बात पर हैरानी जताई कि विपक्षी दलों में मौजूद वरिष्ठ वकीलों ने अपने नेताओं को यह क्यों नहीं बताया कि न्यायिक प्रक्रिया कैसे काम करती है। उन्होंने कहा, "क्या किसी ने उन्हें यह नहीं बताया कि मुख्य न्यायाधीश हर मामले की सुनवाई खुद नहीं करते? मुख्य न्यायाधीश जिस बेंच को मामला सौंपते हैं, वही बेंच उसकी सुनवाई करती है और फैसला देती है।"
उन्होंने इस घटना को दबाव की रणनीति बताते हुए कहा कि यह संविधान और स्थापित व्यवस्थाओं में अविश्वास को दर्शाता है। साल्वे के अनुसार, "अगर आप संविधान के अनुसार चलना चाहते हैं और संविधान की लाल किताब की बात करते हैं, तो न्यायपालिका के सामने इस तरह की राजनीतिक मांग नहीं रखी जा सकती।"
न्यायपालिका में घटते भरोसे पर चिंता
जब साल्वे से CJI के उस कथित बयान के बारे में पूछा गया जिसमें न्यायपालिका से लोगों का भरोसा उठने की बात कही गई थी, तो उन्होंने वकीलों के बदलते रवैये पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहले के वकील जिस मामले की पैरवी करते थे, उस पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचते थे, लेकिन अब वकील ही राजनीतिक नेता हैं और मनमुताबिक फैसला न आने पर कहते हैं कि उनका न्यायपालिका से भरोसा उठ गया है।
साल्वे ने कहा, "यह भारत के भविष्य के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। आप यह नहीं कह सकते कि अगर अदालत ने आपकी पसंद का फैसला नहीं दिया, तो आपका न्यायपालिका से भरोसा उठ जाएगा।"
कपिल सिब्बल पर टिप्पणी
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के न्यायपालिका पर भरोसे से जुड़े बयानों पर भी साल्वे ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "अगर मेरा न्यायपालिका पर भरोसा न हो, तो मैं खुद अदालत में पेश नहीं होऊंगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी फैसले से असहमत होना और न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाना, दो अलग-अलग बातें हैं। उनके मुताबिक, यह कहना कि भरोसा उठ गया, यह संकेत देता है कि न्यायपालिका जानबूझकर गलत फैसले दे रही है।
इनपुट: IANS



