भारत के इतिहास में 26 जनवरी का विशेष महत्व

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संविधान को भारत में लाने के लिए काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा. जिसके निर्माण के लिए 29 अगस्त 1947 को एक प्रारूप समिति की स्थापना की गई. और इसकी जिम्मेदारी डॉ. भीमराव अंबेडकर को सौपी गई. जिसके लिए दुनिया भर के तमाम संविधानों को बारीकी से परखने के बाद ही डॉक्टर भीमराव ने भारतीय संविधान को तैयार किया. जिसके बाद 1950 में 26 जनवरी के दिन ही भारत सरकार “अधिनियम” यानी की एक्ट 1935 को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया.

इस दिन पहली बार बतौर राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद बग्गी पर बैठकर राष्ट्रपति भवन से निकले थे. पहली बार उन्होंने भारतीय सैन्य बल की सलामी ली थी. इतना ही नहीं पहली बार ही उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर से समान्नित किया गया था. एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के लिए संविधान को 26 नवंबर 1949 में भारतीय संविधान को सभा द्वारा अपनाया गया.

जिस दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे. डॉ भीमराव अम्बेडकर के नेतृत्व में ही हमारे देश का संविधान लिखा गया था, जिसे लिखने में लगभग पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिन लग गए. जिसे 26 जनवरी को लागू किया गया था.

साल 1929 दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ. इस अधिवेशन में प्रस्ताव को पारित कर इस बात की घोषणा कर दी गई कि यदि अंग्रेज सरकार द्वारा 26 जनवरी 1930 तक भारत को उपनिवेश का दर्जा नहीं दिया गया तो भारत को पूर्ण रूप से स्‍वतंत्र देश घोषित कर दिया जाएगा.

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26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारतीय संविधान सुपूर्द किया गया, इसी लिए हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है. अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये. इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को देश भर में लागू हो गया
पूर्ण स्वराज दिवस को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान 26 जनवरी को लागू किया गया था. गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और हर साल 21 तोपों की सलामी दी जाती है.