पाकिस्तान में नवाज़ की बर्खास्तगी पर मोदी से सवाल

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पनामा पेपर लीक मामले में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने वहां के प्रधानमंत्री को बर्खास्त कर दिया है। मई 2016, में पनामा पेपर लीक मामले में भारत पाकिस्तान समेत दुनियां के कई बड़े लोगों के नामों का खुलासा हुआ था। जिनमें राजनीति से लेकर बड़े से बड़े ब्यूरोक्रेट्स के भी नामों का खुलासा हुआ था। इसी मामले में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ पर मुकदमा चल रहा था, जिसमें वहां के सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाते हुए शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार दिया है। अदालत के फैसले के बाद नवाज़ शरीफ ने इस्तीफा दे दिया है।
मोदी से सवाल
पानामा लीक मामले में जब से पाकिस्तान की अदालत ने फैसला सुनाया है तभी से भारत में प्रधानमंत्री मोदी से ये सवाल पूछा जा रहा है कि क्या हमारे देश में भी पनामा के आरोपियों के ऊपर जांच शुरू होगी? बताना जरूरी है कि पनामा लीक मामले में ‘इंडिया बुल’ के ऑनर समीर गहलोत और ‘डीएलएफ’ के प्रमोटर के.पी. सिंह समेत कई नामचीन हस्तियों के भी नाम थे। ऐसे में मॉनसून सत्र के लिए विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए एक बड़ा मुद्दा हो सकता है।

क्या है पनामा लीक मामला
पनामा पेपर्स पानामनियन कंपनी मोसेक फोनसेका द्वारा इकट्ठा किया हुआ 1 करोड़ 15 लाख गुप्त फाइलों का भंडार है। इनमें कुल 2,14,000 कंपनियों से सम्बन्धित जानकारिया हैं। इसमें उस कंपनी के निर्देशक आदि की जानकारी भी है। इसी कंपनी के पेपर को जॉन डे नाम के पत्रकार ने मई 2016 में लीक कर दुनियां के कई दिग्गजों की नींद उड़ा दी थी।
नवाज़ शरीफ के सामने विकल्प
नवाज़ शरीफ अपने भाई शाहबाज को पीएम पद के लिए आगे कर सकते हैं। लेकिन शाहबाज़ नेशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं। उनकी बेटी मरियम को भी अदालत ने दोषी ठहराया है। नवाज़ अपने किसी ख़ास को पीएम बना सकते हैं। लेकिन देखना ये होगा कि क्या वो खास, पाकिस्तानी मुस्लिम लीग पार्टी और पाकिस्तान की सत्ता को संभाल पाएंगे? इनका भी नाम चर्चा में है, इन दोनों के बाद ख्वााजा मुहम्मद आसिफ, राणा तनवीर, शाहिद खकान अब्बासी और शेख आफताब का नाम भी चर्चा में है।
पाकिस्तान में किसको फायदा
पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी पीपीपी की राजनीतिक स्थिति अभी इतनी मजबूत नहीं है कि उनको इससे ज्यादा फायदा हो सकता है। लेकिन पाकिस्तान तहरीए-ए-इस्लाम पार्टी जिसके प्रमुख इमरान खान हैं, इनको इसका फायदा मिल सकता है।
पाकिस्तान में फौजी शासन होगा लागू?
इसमें कोई संदेह नहीं कि पाकिस्तान में पिछली बार की सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से पांच साल पूरा किया था और वर्तमान में भी जनता द्वारा चुनी हुई सरकार ही सत्ता में है। इसलिए फौज पहले से कुछ कमजोर स्थिति में है। लेकिन ये कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पाकिस्तानी फौज सत्ता पर काबिज हो सकती है।
भारत पर असर
पाकिस्तान में जब भी कुछ बड़ा बदलाव होता है तो निश्चित रूप से भारत पर इसका प्रभाव पड़ता है। इस फैसले के बाद पड़ोसी मुल्क में फौजी शासन आने के आसार बढ़ गए है और पाकिस्तानी फौज जब-जब सत्ता में आई है पाकिस्तान की साथ हमारे संबंध बेहद खराब हुए हैं। खासकर इस वक्त तो चीन से भी हमारे रिश्ते नाजुक मोड़ पर है। ऐसे में पाकिस्तानी फौज का सत्ता में आना भारत के लिए नुकसान देह हो सकता है।

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