AI से बढ़ी लागत, अनिश्चित माहौल: Zoho इस साल कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ाएगी
सॉफ्टवेयर कंपनी ज़ोहो (Zoho) ने इस साल अपने कर्मचारियों को सामान्य वेतन वृद्धि (salary hike) नहीं देने का फैसला किया है। कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने मंगलवार को बताया कि…
सॉफ्टवेयर कंपनी ज़ोहो (Zoho) ने इस साल अपने कर्मचारियों को सामान्य वेतन वृद्धि (salary hike) नहीं देने का फैसला किया है। कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने मंगलवार को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से कंपनी की लागत में भारी इज़ाफ़ा हुआ है, जबकि कारोबारी माहौल अनिश्चित बना हुआ है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में इन चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने मार्केटिंग बजट में भी कटौती की है। वेम्बु ने वेतन वृद्धि टालने के लिए कर्मचारियों से माफी भी मांगी और कहा, "मैं इसे टाल नहीं पाने के लिए उनसे माफी मांगता हूं।"
AI और वैश्विक चुनौतियां
वेम्बु ने लागत बढ़ने के पीछे के कारणों को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा सेंटरों के लिए ज़रूरी सर्वर की कीमतें लगभग चार गुना बढ़ गई हैं। इससे कंपनी के परिचालन खर्च (operational expenses) में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को भी कारोबार के लिए एक बड़ी चुनौती बताया।
भविष्य की रणनीति और रोज़गार
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए वेम्बु ने कहा, "हम खुद को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया में हैं। अगले 3 से 5 वर्ष तय करेंगे कि हमारा यह बदलाव कितना सफल रहा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ज़ोहो बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी, लेकिन सॉफ्टवेयर उद्योग में रोजगार का दृष्टिकोण फिलहाल चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने जानकारी दी कि कंपनी ने पिछले 18 महीनों में कर्मचारियों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं की है। वेम्बु ने इस बात के लिए कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया कि वे मौजूदा परिस्थितियों को समझ रहे हैं।
AI वैल्यूएशन पर पहले भी जताई थी चिंता
यह पहली बार नहीं है जब श्रीधर वेम्बु ने AI से जुड़ी चिंताओं पर बात की है। इसी साल मई में उन्होंने AI को लेकर तकनीकी कंपनियों के बढ़ते वैल्यूएशन पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि निवेशकों का उत्साह कई बड़ी टेक कंपनियों के मूल्यांकन को 'डॉट-कॉम बुलबुले' जैसे स्तर पर ले गया है। उस समय उन्होंने एनवीडिया, एप्पल, अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा था कि वे अपने वार्षिक राजस्व की तुलना में बहुत ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रही हैं।
इनपुट: IANS



