पश्चिम बंगाल: 'फर्जी डॉक्टर' विवाद के बाद 17 सालों के मेडिकल रजिस्ट्रेशन की जांच शुरू
पश्चिम बंगाल में फर्जी डॉक्टरों के पंजीकरण से जुड़े आरोपों के सामने आने के बाद राज्य की मेडिकल काउंसिल ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल…
पश्चिम बंगाल में फर्जी डॉक्टरों के पंजीकरण से जुड़े आरोपों के सामने आने के बाद राज्य की मेडिकल काउंसिल ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने पिछले 17 वर्षों के दौरान राज्य में प्रैक्टिस कर रहे सभी डॉक्टरों के पंजीकरण का ऑडिट शुरू कर दिया है। सोमवार से शुरू हुई इस प्रक्रिया का मकसद किसी भी तरह के फर्जी या अनियमित पंजीकरण का पता लगाना है।
काउंसिल के सूत्रों ने बताया है कि इस व्यापक जांच के दौरान अगर कोई भी डॉक्टर फर्जी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में न केवल उस व्यक्ति का एमबीबीएस पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा, बल्कि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई जाएगी।
ऑडिट की प्रक्रिया और मांगी गई जानकारी
इस ऑडिट को सुचारू रूप से चलाने के लिए काउंसिल ने संबंधित एजेंसियों से पिछले 17 वर्षों का पूरा ब्योरा एक्सेल फॉर्मेट में देने का अनुरोध किया है। इस जानकारी में सिर्फ डॉक्टरों के नाम या पंजीकरण संख्या ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विवरण भी शामिल हैं।
एजेंसियों को डॉक्टरों के नाम, उन्हें जारी की गई पंजीकरण संख्या, पिता का नाम, लिंग, वर्तमान पता, प्राथमिक शैक्षणिक योग्यता और एमबीबीएस की डिग्री देने वाले विश्वविद्यालय का नाम उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके अलावा, यदि किसी डॉक्टर के पास कोई अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यता है, तो उसका और उसे प्रदान करने वाले संस्थान का विवरण भी मांगा गया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
यह ऑडिट 15 सितंबर को दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद शुरू हुआ है। निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संघ (APHN) के सचिव राजीव पांडे ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त कार्यालय में एक शिकायत दर्ज कराकर राज्य में फर्जी डॉक्टरों के पंजीकरण में कथित वृद्धि की जांच की मांग की थी। उनकी शिकायत में पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष सुदीप्ता रॉय, सचिव सुशांत रॉय, रजिस्ट्रार मानस चक्रवर्ती और परिषद सदस्य विधायक निर्मल माजी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल थे। उल्लेखनीय है कि रॉय और माजी दोनों ही तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक रह चुके हैं।
इनपुट: IANS



