शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बंगाल: 25 सालों में चुनावी हिंसा के पीड़ितों के परिजनों को मिलेगी सरकारी नौकरी, प्रशासन ने शुरू की तैयारी

पश्चिम बंगाल में पिछले ढाई दशकों के दौरान चुनावी और राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को राज्य सरकार अब सरकारी नौकरी देगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले को लागू…

बंगाल: 25 सालों में चुनावी हिंसा के पीड़ितों के परिजनों को मिलेगी सरकारी नौकरी, प्रशासन ने शुरू की तैयारी
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में पिछले ढाई दशकों के दौरान चुनावी और राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को राज्य सरकार अब सरकारी नौकरी देगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले को लागू करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस नीति के तहत, बीते 25 वर्षों में हुए पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों की हिंसा में मारे गए लोगों के परिजन पात्र होंगे।

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राज्य के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। इस नीति की सबसे अहम बात यह है कि नौकरी देते समय किसी भी तरह का राजनीतिक भेदभाव नहीं किया जाएगा। पीड़ित परिवार चाहे किसी भी राजनीतिक दल का समर्थक रहा हो, अगर वे निर्धारित प्रशासनिक शर्तों को पूरा करते हैं, तो उन्हें नौकरी दी जाएगी।

पात्र परिवारों की पहचान और प्रक्रिया

जिला स्तर पर इस नीति को अमल में लाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। हाल ही में, राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि वे ऐसे पात्र परिवारों की पहचान करने और शुरुआती दस्तावेज तैयार करने का काम शुरू करें।

चूंकि ये मामले 25 साल तक पुराने हो सकते हैं, इसलिए दावों की पुष्टि करना एक बड़ी चुनौती होगी। प्रशासन मुख्य रूप से पुलिस रिकॉर्ड, पुराने केस की फाइलों और आधिकारिक मृत्यु दस्तावेजों के आधार पर ही किसी मौत का संबंध चुनावी हिंसा से जोड़ेगा।

आवेदन और जांच की प्रक्रिया

राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में एक औपचारिक अधिसूचना जारी करेगी, जिसमें नौकरी के लिए जरूरी उम्र सीमा, शैक्षिक योग्यता और पदों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके बाद सार्वजनिक विज्ञापनों के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।

प्राप्त आवेदनों की कई स्तरों पर जांच होगी। स्थानीय पुलिस स्टेशन, जिला प्रशासन और कानूनी विशेषज्ञ मिलकर दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि करेंगे। सभी जांच पूरी होने और दावे सही पाए जाने के बाद ही पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए कानून विभाग से औपचारिक मंजूरी भी ली गई थी।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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