सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लगभग तय, अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो ने दिए जल्द ऐलान के संकेत

भारत और अमेरिका के बीच एक बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर बातचीत अब अंतिम दौर में पहुँच गई है। अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो ने सोमवार को अपनी भारत यात्रा से ठीक पहले यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि…

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लगभग तय, अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो ने दिए जल्द ऐलान के संकेत
(फोटो: IANS)

भारत और अमेरिका के बीच एक बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर बातचीत अब अंतिम दौर में पहुँच गई है। अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो ने सोमवार को अपनी भारत यात्रा से ठीक पहले यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते पर ज़्यादातर काम पूरा हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, रूबियो ने कहा, "हम इस समय भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं।" यह बयान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

समझौते की राह और प्रमुख बाधाएं

इस व्यापार समझौते का मुख्य लक्ष्य भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिका में शुल्कों को कम और स्थिर करना है, जिसके बदले में भारत अमेरिकी उत्पादों को अपने बाज़ार में व्यापक पहुँच देगा। हालांकि, डेयरी क्षेत्र तक पहुँच का मुद्दा अब भी इस समझौते की राह में एक बड़ी बाधा बना हुआ है। इससे पहले, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी कह चुके हैं कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसका कानूनी मसौदा तैयार हो रहा है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल ही में कहा था कि बातचीत "लैंडिंग प्वाइंट" के करीब है।

रूसी तेल और वैश्विक संतुलन

रूबियो ने रूसी तेल और गैस के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने बताया कि वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर असर को देखते हुए अमेरिका को पिछले कुछ महीनों में कई प्रतिबंधों में ढील देनी पड़ी। उन्होंने कहा, "प्रत्येक देश के सामने अलग-अलग और जटिल परिस्थितियां होती हैं। भौगोलिक वास्तविकताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं... विदेश नीति बनाते समय इन सभी बातों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।" इसी संदर्भ में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को लागू करने के आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए रूसी तेल खरीदने वाले देशों को शुल्कों में छूट दी है।

समझौते की रूपरेखा और भारत का प्रदर्शन

फरवरी में घोषित रूपरेखा के तहत, अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क 25% से घटाकर 18% कर दिया था और रूसी तेल खरीदने पर लगने वाला अतिरिक्त 25% शुल्क भी हटा दिया था। इसके बदले में भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और ट्री नट्स, सोयाबीन तेल जैसे कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने या खत्म करने पर सहमति जताई थी। इस बीच, भारत का व्यापारिक प्रदर्शन भी मज़बूत बना हुआ है। सितंबर 2026 में देश का माल निर्यात 23% बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जबकि व्यापार घाटे में भी कमी आई।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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