अमेरिकी कामगारों की जगह विदेशी कर्मचारी बर्दाश्त नहीं, वीज़ा धोखाधड़ी पर सख्त होंगे: उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर कम वेतन वाले विदेशी कामगारों को नौकरी पर रखने वाले नियोक्ताओं से सख्ती से निपटा जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के…
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर कम वेतन वाले विदेशी कामगारों को नौकरी पर रखने वाले नियोक्ताओं से सख्ती से निपटा जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उत्तरी कैरोलिना में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें वीज़ा धोखाधड़ी पर लगाम लगाने का अधिकार दिया है।
उत्तरी कैरोलिना के किंस्टन में मध्यावधि चुनाव से पहले हुई इस रैली में वेंस ने नौकरियों की सुरक्षा को एक प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने मुझे और मेरी टीम को वीज़ा धोखाधड़ी पर लगाम लगाने और ऐसे लोगों के खिलाफ लड़ने की जिम्मेदारी दी है, जो अमेरिकी कामगारों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह कम वेतन वाले विदेशी नागरिकों को रख लेते हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "अमेरिकी नौकरियां अमेरिकी नागरिकों को ही मिलनी चाहिए।"
नीतिगत घोषणा नहीं, प्राथमिकताओं का संकेत
हालांकि, अपने भाषण में उपराष्ट्रपति वेंस ने किसी नई वीज़ा नीति या कार्रवाई की घोषणा नहीं की। उन्होंने पात्रता, आवेदन प्रक्रिया या नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों में किसी भी बदलाव का कोई जिक्र नहीं किया। उनके बयान को किसी नए नियम के बजाय प्रशासन की प्राथमिकताओं के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। वेंस ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि वह किस टीम का जिक्र कर रहे थे या राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें यह जिम्मेदारी कब सौंपी।
व्यापारियों को संदेश और चेतावनी
वेंस ने कारोबारी समुदाय को एक स्पष्ट संदेश देते हुए अमेरिकी कामगारों में निवेश करने वाले व्यवसायों को समर्थन का वादा किया। साथ ही, उन्होंने उन कंपनियों को चेतावनी दी जो अपनी नौकरियां विदेशों में ले जा रही हैं। उन्होंने कहा, "अगर आप हमारे साथ मिलकर काम करने और अमेरिकी कामगारों में निवेश करने को तैयार हैं, तो हम आपके सबसे बड़े समर्थक बनेंगे। लेकिन अगर आप अमेरिकी नौकरियों को विदेशों में ले जाना चाहते हैं, तो हम पूरी ताकत से आपका विरोध करेंगे।"
अपने भाषण के दौरान उन्होंने किसी विशेष कंपनी का नाम नहीं लिया और न ही नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत पेश किया। उनके बयान में भारत, भारतीय कामगारों या एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम का कोई विशेष उल्लेख नहीं था। यह रैली 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से छह दिन पहले आयोजित की गई थी, जिसमें आव्रजन, सार्वजनिक सुरक्षा और कराधान जैसे अन्य मुद्दों पर भी बात की गई।
इनपुट: IANS



