ईरान पर अमेरिकी शिकंजा: सभी 27 एयरलाइंस प्रतिबंधित, कई देशों की कंपनियों पर भी कार्रवाई
ईरान पर दबाव बढ़ाने की अपनी रणनीति के तहत अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान की सभी 27 बची हुई एयरलाइंस को अपनी 'स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स'…
ईरान पर दबाव बढ़ाने की अपनी रणनीति के तहत अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान की सभी 27 बची हुई एयरलाइंस को अपनी 'स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स' (SDN) सूची में डाल दिया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के विमानन उद्योग को पूरी तरह से अलग-थलग करना है।
मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया कि ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस लंबे समय से सरकार की 'अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों' में सहायक रही हैं। विभाग का दावा है कि ईरान का इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) कथित तौर पर इन निजी एयरलाइंस का इस्तेमाल अपने कर्मियों को लाने-ले जाने और हथियार खरीदने व उनकी ढुलाई के लिए करता रहा है।
तीसरे देशों पर भी कार्रवाई
नए प्रतिबंधों का दायरा सिर्फ़ ईरान तक ही सीमित नहीं है। अमेरिका ने उन विदेशी कंपनियों और बिचौलियों को भी निशाना बनाया है जो कथित तौर पर ईरान की मदद कर रहे थे। वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान में स्थित चार कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया है। इन पर आरोप है कि वे ईरान की 'महान एयर' को कार्गो और बिक्री से जुड़ी सेवाएं दे रही थीं।
इसके अलावा, अमेरिका ने उन गुप्त फ्रंट कंपनियों और भ्रामक ट्रांजिट मार्गों को भी लक्षित किया है, जिनका इस्तेमाल ईरान अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक हासिल करने के लिए करता है। विज्ञप्ति में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि महान एयर को 2026 की गर्मियों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान के रास्ते कम से-कम तीन बी-777 विमान मिले थे।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
इन प्रतिबंधों के जवाब में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनका देश पूरी ताकत से अपना प्रतिरोध जारी रखेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "जिस तरह ईरान ने अब तक साहस के साथ हर आक्रमण का मुकाबला किया है, उसी तरह वह आगे भी पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरा पछतावा न हो जाए।"
हालांकि, पेजेश्कियन ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है और मानता है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा युद्ध भड़काने से बचने में ही है। अमेरिका ने ईरान की महान एयर पर पहली बार अक्टूबर 2011 में प्रतिबंध लगाए थे।
इनपुट: IANS



