अमेरिका में H-1B वीज़ा एक्सटेंशन के नियम होंगे सख्त, भारतीय पेशेवरों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों भारतीय पेशेवरों के लिए वीज़ा एक्सटेंशन की प्रक्रिया पहले से ज़्यादा जटिल हो सकती है। अमेरिकी सरकार एक ऐसी नीति पर विचार कर रही है, जिसके तहत H-1B और L-1 जैसे वीज़ा के…
अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों भारतीय पेशेवरों के लिए वीज़ा एक्सटेंशन की प्रक्रिया पहले से ज़्यादा जटिल हो सकती है। अमेरिकी सरकार एक ऐसी नीति पर विचार कर रही है, जिसके तहत H-1B और L-1 जैसे वीज़ा के नवीनीकरण (extension) आवेदनों की हर बार नए सिरे से पड़ताल की जाएगी। इस बदलाव से सबसे ज़्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है, जो अमेरिका में H-1B वीज़ा पर काम करने वालों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इस संबंध में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका शीर्षक 'रिमूविंग डिफरेंस टू प्रायर यूएससीआईएस डिटरमिनेशंस ऑफ एलिजिबिलिटी' है। यह प्रस्ताव 14 अक्टूबर को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित हुआ था और इस पर सार्वजनिक राय देने की अंतिम तारीख 13 नवंबर है। यह प्रस्ताव उस नियम को खत्म करने की बात करता है जो अधिकारियों को पिछली वीज़ा मंजूरी को सम्मान देने के लिए बाध्य करता है, बशर्ते कि परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव न हुआ हो।
क्या है मौजूदा और प्रस्तावित नियम में अंतर?
अभी लागू नियम 8 सीएफआर 214.1(सी)(5) के अनुसार, अगर किसी कर्मचारी और कंपनी के लिए पहले वीज़ा मंजूर हो चुका है, तो एक्सटेंशन देते समय अधिकारी को आम तौर पर उस फैसले का सम्मान करना होता है। लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होने पर अधिकारी पिछली मंजूरी को आधार मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे। यानी, हर बार वीज़ा एक्सटेंशन के आवेदन की जांच एक नए आवेदन की तरह ही की जाएगी। इसका असर H-1B और L-1 के अलावा O-1, TN, E और P श्रेणी के वीज़ा पर भी पड़ेगा।
भारतीय पेशेवरों पर असर और आंकड़े
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के आंकड़े बताते हैं कि इस बदलाव का भारतीय समुदाय पर व्यापक असर पड़ सकता है। वित्त वर्ष 2024 में मंजूर हुए लगभग 3.99 लाख H-1B वीज़ा में से 71% लाभार्थी भारत में जन्मे थे। वहीं, रोज़गार जारी रखने की श्रेणी में (जिसमें एक्सटेंशन भी शामिल है) मंज़ूर हुए 2.58 लाख आवेदनों में से करीब 79% (2.03 लाख) भारतीय मूल के पेशेवर थे। विभाग का अनुमान है कि इस नीतिगत बदलाव से हर साल करीब 2.08 लाख आवेदन प्रभावित हो सकते हैं।
क्यों लाया जा रहा है यह बदलाव?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का तर्क है कि मौजूदा नियम आव्रजन अधिकारी पर यह साबित करने का बोझ डालता है कि वह पिछले फैसले से अलग निर्णय क्यों ले रहा है। प्रस्तावित बदलाव अधिकारियों को हर आवेदन का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करने की शक्ति देगा। विभाग ने अपने तर्क के समर्थन में कार्यस्थल निरीक्षण के आंकड़े भी दिए हैं, जिनके अनुसार वित्त वर्ष 2022-25 में H-1B एक्सटेंशन से जुड़े कार्यस्थलों पर नियमों के उल्लंघन और धोखाधड़ी के मामले 22% पाए गए, जो 2018-20 के 17% के आंकड़े से ज़्यादा हैं।
प्रक्रिया में देरी और अतिरिक्त लागत की आशंका
DHS का अनुमान है कि पिछली मंजूरी को प्राथमिकता न देने से अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगने वाले नोटिस (Request for Evidence - RFE) की दर में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे हर साल करीब 6,000 अतिरिक्त नोटिस जारी होने की संभावना है। जिन आवेदनों पर RFE जारी होता है, उन्हें निपटाने में औसतन 64 दिन ज़्यादा लगते हैं। विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया से आवेदकों और नियोक्ताओं पर सालाना लगभग 1.34 लाख डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान लगाया है।
इनपुट: IANS



