अमेरिका-ईरान तनाव: कतर की मध्यस्थता में बातचीत जारी, पर बड़ी सफलता अब भी दूर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता में चल रही कूटनीतिक बातचीत में कुछ प्रगति तो हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता में चल रही कूटनीतिक बातचीत में कुछ प्रगति तो हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दोनों पक्ष शांति प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं, पर अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि दोनों पक्षों के बीच की दूरी कम करने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा, "अमेरिका और ईरान दोनों ही मध्यस्थों की ओर से दिए गए सुझावों और प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे हैं।"
तेहरान में लंबी चली बैठक
इस सिलसिले में कतर का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में तेहरान गया था। प्रवक्ता अल अंसारी ने बताया कि यह प्रतिनिधिमंडल सोमवार शाम को ही ईरान से लौटा है। वहां ईरानी अधिकारियों के साथ एक घंटे की निर्धारित बैठक तीन घंटे से भी ज़्यादा चली। इस दौरान वाशिंगटन और तेहरान के बीच मतभेद सुलझाने के लिए कई विचारों और प्रस्तावों पर चर्चा हुई। अल अंसारी के अनुसार, इस यात्रा के बाद भी मध्यस्थता के प्रयास लगातार जारी हैं।
कोई बड़ी सफलता नहीं, पर बातचीत जारी
हालांकि, प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि चल रही बातचीत को अभी किसी बड़ी सफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई ऐसा ठोस नतीजा सामने नहीं आया है, जिसकी औपचारिक घोषणा की जा सके। इसके बावजूद, एक सकारात्मक पहलू यह है कि दोनों ही पक्ष बातचीत को आगे बढ़ाने की इच्छा दिखा रहे हैं। कतर का लक्ष्य एक ऐसे अंतरिम समझौते तक पहुंचना है, जिससे दोनों देशों में भरोसा बढ़े और एक स्थायी समाधान का रास्ता खुल सके।
समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय समन्वय
माजिद अल अंसारी ने अरब सागर क्षेत्र में कतर के एलएनजी जहाज 'अल मयेदा' से जुड़ी हालिया घटना की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि कतर समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही को खतरे में डालने वाली किसी भी कार्रवाई का पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने यह भी बताया कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देश क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोकने के लिए लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं, क्योंकि संघर्ष का फिर से बढ़ना किसी के भी हित में नहीं है।
इनपुट: IANS



