एयरबस को मिले रिकॉर्ड कर्ज़ पर अमेरिका की आपत्ति, पुराने व्यापारिक समझौते पर मंडराए संकट के बादल
यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी एयरबस को दिए गए एक बड़े निवेश ऋण ने अमेरिका और यूरोप के बीच विमान सब्सिडी को लेकर दशकों पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। अमेरिका ने इस ऋण पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा…
यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी एयरबस को दिए गए एक बड़े निवेश ऋण ने अमेरिका और यूरोप के बीच विमान सब्सिडी को लेकर दशकों पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। अमेरिका ने इस ऋण पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इससे दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सोमवार को कहा कि यूरोपीय निवेश बैंक ने एयरबस के इतिहास का सबसे बड़ा ऋण मंजूर किया है। उन्होंने बताया कि बार-बार जानकारी मांगने के बावजूद अमेरिका को इस वित्तीय सहायता का पूरा विवरण अब तक नहीं दिया गया है, जिससे वॉशिंगटन की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
विवाद की जड़ और अमेरिकी चिंता
यह ऋण एयरबस की फ्रांस, जर्मनी और स्पेन स्थित विभिन्न परियोजनाओं के लिए दिया जाना है। इसी को लेकर अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ये देश लंबे समय से एयरबस को विशेष समर्थन देते रहे हैं, जिससे अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनियों और उनके कर्मचारियों को अनुचित रूप से नुकसान हुआ है। ग्रीर ने एक बयान में कहा, "मुझे सच में उम्मीद थी कि एयरबस को मिलने वाली और व्यापार को प्रभावित करने वाली यूरोपीय सब्सिडी अब बीते समय की बात हो चुकी होगी।"
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) के अनुसार, यह ऋण गर्मियों में उस समय मंजूर किया गया था, जब यूरोपीय संघ ने विमान सब्सिडी विवाद से जुड़े जवाबी शुल्कों के निलंबन की अवधि बढ़ाई थी। ग्रीर के मुताबिक, ऋण की मंजूरी के समय और पारदर्शिता की कमी ने अमेरिकी प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
समझौते का भविष्य दांव पर
अमेरिका और यूरोपीय संघ ने 2021 में एक अहम समझौता किया था, जिसके तहत एक-दूसरे पर लगाए गए जवाबी शुल्कों को पांच साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। इसका उद्देश्य विमान निर्माताओं को मिलने वाली फंडिंग के लिए व्यावसायिक शर्तों पर आधारित नियम बनाना था। अब एयरबस को मिले इस नए कर्ज़ ने उस समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, अमेरिका ने फिलहाल कोई नया शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ग्रीर की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि वॉशिंगटन इस ऋण को समझौते की शर्तों के उल्लंघन के तौर पर देख रहा है। उन्होंने कहा, "यह जरूरी है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए, ताकि विमानन क्षेत्र में बाजार आधारित उत्पादन सुनिश्चित हो सके और हमारे लंबे प्रयासों से बने समझौते की शर्तों का उल्लंघन न हो।"
इनपुट: IANS



