पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के उत्पीड़न पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई गहरी चिंता, सरकार से की कार्रवाई की मांग
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के साथ हो रहे भेदभाव, हिंसा और कानूनी पाबंदियों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। सोमवार को जारी एक बयान में, विशेषज्ञों ने देश में…
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के साथ हो रहे भेदभाव, हिंसा और कानूनी पाबंदियों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। सोमवार को जारी एक बयान में, विशेषज्ञों ने देश में अहमदिया लोगों की लगातार बिगड़ती स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया और पाकिस्तानी हुक्मरानों से मानवाधिकारों से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह किया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने अहमदिया समुदाय के खिलाफ लगातार हो रही हिंसा और उत्पीड़न की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अपने बयान में कहा, "हम उन लगातार आ रही खबरों को लेकर बहुत चिंतित हैं जिनमें कहा गया है कि अहमदिया समुदाय को उनकी धार्मिक पहचान के कारण उत्पीड़न, आपराधिक मुकदमों, हिंसा और बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है।"
कानूनी भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार
विशेषज्ञों ने उन घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया जहां अहमदिया समुदाय के पूजा स्थलों पर हमले किए गए, कब्रों को अपवित्र किया गया और ईद-उल-फितर व ईद-उल-अजहा जैसे धार्मिक आयोजनों में बाधा डाली गई। उन्होंने धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों की गिरफ्तारी और उन पर चलाए जा रहे मुकदमों के साथ-साथ समुदाय के खिलाफ फैल रहे नफरत भरे भाषणों (हेट स्पीच) का भी मुद्दा उठाया।
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति को अपने धर्म या विश्वास को मानने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा, "किसी के साथ भेदभाव, डराने-धमकाने या हिंसा नहीं होनी चाहिए, न ही उन्हें शांतिपूर्वक अपने विश्वास को मानने से रोका जाना चाहिए...।"
सरकार की जवाबदेही पर सवाल
UN विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया कि वह हिंसा को रोकने और कमजोर समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए। उन्होंने 'बिना सजा के बच निकलने' (इम्युनिटी) की उस संस्कृति को समाप्त करने की जरूरत पर बल दिया, जिसके कारण हमलावर बिना किसी रोक-टोक के काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, "ये हमले अधिकारियों की मौन मिलीभगत से होते हैं।"
सरकार को सलाह दी गई है कि वह अपने उन कानूनों और प्रशासनिक उपायों की समीक्षा करे जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुरूप नहीं हैं, ताकि धर्म, अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता जैसे अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके। विशेषज्ञों ने कहा कि सिर्फ कुछ घटनाओं पर प्रतिक्रिया देना काफी नहीं है, बल्कि धार्मिक असहिष्णुता से निपटने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
इनपुट: IANS



