दिल्ली दंगा: जमानत अर्जी खारिज होने पर उमर खालिद और शरजील इमाम ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
दिल्ली में 2020 में हुए दंगों की 'बड़ी साजिश' के आरोप में जेल में बंद छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दोनों ने अपनी…
दिल्ली में 2020 में हुए दंगों की 'बड़ी साजिश' के आरोप में जेल में बंद छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दोनों ने अपनी नई जमानत याचिकाओं को खारिज करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अलग-अलग विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) दायर की हैं।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ये याचिकाएं 4 नवंबर को दायर की गईं। उमर खालिद की याचिका का डायरी नंबर 70020/2026 और शरजील इमाम की याचिका का 70106/2026 है। फिलहाल इन याचिकाओं को 90 दिनों के लिए 'केस अंडर डिफेक्ट लिस्ट' में दिखाया गया है।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका?
दोनों कार्यकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के 30 सितंबर के उस साझा फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी अपील खारिज कर दी गई थी। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई, 2026 के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें उन्हें नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि निचली अदालत उन विशेष शर्तों और सीमाओं को नहीं बदल सकती, जो सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में उनकी पिछली जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए तय की थीं।
हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उमर खालिद और शरजील इमाम को साजिश का 'मास्टरमाइंड' और 'मुख्य साजिशकर्ता' बताते हुए उनकी भूमिका को जमानत पा चुके अन्य सह-आरोपियों से अलग माना था। इसलिए, तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को मिली अंतरिम जमानत का आधार उन पर लागू नहीं होता।
मामले की पृष्ठभूमि और पिछली सुनवाई
इससे पहले, 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन उन्हें एक विकल्प दिया था। अदालत ने कहा था कि वे अभियोजन पक्ष के संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने पर या आदेश की तारीख से एक साल बाद (जो भी पहले हो) दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, दोनों ने जून 2026 में ही बदली हुई परिस्थितियों का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी।
उन्होंने अपनी दलीलों में मुकदमे में देरी, दूसरे यूएपीए मामले में लंबे समय तक हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और सह-आरोपियों तस्लीम अहमद व खालिद सैफी को मिली अंतरिम जमानत का जिक्र किया था। ट्रायल कोर्ट और फिर हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
यह पूरा मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस मामले में दोनों कार्यकर्ताओं पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) समेत कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
इनपुट: IANS



