‘उड़ान’ योजना ने बदली हवाई यात्रा की तस्वीर: डेढ़ करोड़ लोगों ने किया सफ़र, अब 4 करोड़ का लक्ष्य
भारत की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना 'उड़ान' (उड़े देश का आम नागरिक) ने हवाई यात्रा को आम लोगों की पहुंच में लाने में एक अहम भूमिका निभाई है। समाचार एजेंसी IANS की ओर से नागर विमानन मंत्रालय की…
भारत की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना 'उड़ान' (उड़े देश का आम नागरिक) ने हवाई यात्रा को आम लोगों की पहुंच में लाने में एक अहम भूमिका निभाई है। समाचार एजेंसी IANS की ओर से नागर विमानन मंत्रालय की फैक्टशीट के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस योजना के तहत अब तक 1.49 करोड़ से ज़्यादा यात्री छोटे शहरों और दूर-दराज़ के इलाकों से हवाई सफ़र का लाभ उठा चुके हैं।
इस योजना की सफलता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2014 में देश में जहां 74 हवाई अड्डे थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या दोगुनी से भी ज़्यादा बढ़कर 159 हो गई है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 50 और नए एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
छोटे शहरों को मिली हवाई कनेक्टिविटी
उड़ान योजना ने देश के विमानन नेटवर्क में 90 हवाई अड्डों को जोड़ा है, जिनमें 15 हेलीपोर्ट और दो जल हवाई अड्डे (वॉटर एयरोड्रम) भी शामिल हैं। इन हवाई अड्डों से 625 मार्गों पर उड़ानें संचालित की जा रही हैं। इस पहल ने न केवल दूर-दराज़ के क्षेत्रों को जोड़ा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोज़गार को भी बढ़ावा दिया है, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में।
भविष्य की योजना और प्रोत्साहन
इसकी सफलता को देखते हुए, योजना के अगले चरण का लक्ष्य आने वाले दशक में 120 नए गंतव्यों को जोड़ना और 4 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बनाना है। इसमें पहाड़ी, दूर-दराज़ और पूर्वोत्तर के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, बिहार में नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों का निर्माण और पटना व बिहटा एयरपोर्ट का विस्तार भी भविष्य की योजनाओं में शामिल है।
योजना को एयरलाइंस के लिए आकर्षक बनाने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दिए गए हैं।
- वित्तीय सहायता: सरकार ने कम सेवा वाले मार्गों पर उड़ानों के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding - VGF) के तौर पर 4,023.37 करोड़ रुपए दिए हैं।
- शुल्कों में छूट: इन उड़ानों के लिए लैंडिंग, पार्किंग, टर्मिनल नेविगेशन और रूट नेविगेशन जैसे शुल्कों में छूट दी गई है।
- सस्ता ईंधन: रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) वाले हवाई अड्डों पर विमान ईंधन (ATF) पर उत्पाद शुल्क पहले तीन साल के लिए अधिकतम 2% रखा गया है। राज्यों ने भी इस पर वैट घटाकर 1% या उससे कम करने पर सहमति जताई है।
इन मिले-जुले प्रयासों ने एक ऐसा माहौल बनाया है जिससे एयरलाइंस उन क्षेत्रों में भी अपनी सेवाएं दे पा रही हैं, जहां पहले हवाई संपर्क न के बराबर था।
इनपुट: IANS



