शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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LPG बाज़ार में बड़ा बदलाव: UAE ने अमेरिका को पछाड़कर भारत के लिए फिर बना टॉप सप्लायर

भारत के रसोई गैस (LPG) आयात बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया है, और उसने इस स्थान पर पिछले छह महीनों से…

LPG बाज़ार में बड़ा बदलाव: UAE ने अमेरिका को पछाड़कर भारत के लिए फिर बना टॉप सप्लायर
(फोटो: IANS)

भारत के रसोई गैस (LPG) आयात बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया है, और उसने इस स्थान पर पिछले छह महीनों से काबिज अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव मध्य-पूर्व से आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत है।

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समुद्री खुफिया फर्म केप्लर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में भारत के कुल एलपीजी आयात में UAE की हिस्सेदारी बढ़कर 39% हो गई, जो अगस्त में सिर्फ 13% थी। इसके विपरीत, अगस्त में 53% की हिस्सेदारी रखने वाले अमेरिका का हिस्सा सितंबर में घटकर 23% रह गया।

आंकड़ों में आपूर्ति का फेरबदल

मात्रा के हिसाब से देखें तो UAE ने सितंबर में 5,47,000 टन एलपीजी की आपूर्ति की, जो अगस्त के 1,93,000 टन के मुकाबले 182% की भारी वृद्धि है। वहीं, अमेरिका से आने वाला शिपमेंट अगस्त के 3,23,000 टन से 58% गिरकर सितंबर में कम हो गया। कुवैत और कतर से भी भारत का एलपीजी आयात बढ़ा, जो क्रमशः तीसरे और चौथे सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता रहे। हालांकि, भारत का कुल एलपीजी आयात सितंबर में अगस्त की तुलना में 4% घटकर 13.9 लाख टन रहा।

क्यों अहम है खाड़ी क्षेत्र?

भारत अपनी रसोई गैस की जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है। पहले इस आयात का 90% हिस्सा खाड़ी देशों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था। मध्य-पूर्व में संघर्ष और ईरान द्वारा जहाजों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण इस रास्ते से आपूर्ति बाधित हुई थी, जिसके चलते अमेरिका भारत का शीर्ष सप्लायर बन गया था।

केप्लर के विश्लेषकों का कहना है कि अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का प्रवाह लगभग संघर्ष-पूर्व के स्तर पर लौट आया है। सितंबर के आखिरी हफ्ते में यह प्रवाह युद्ध-पूर्व बेसलाइन का 92% तक पहुँच गया था। इसका श्रेय अमेरिकी सैन्य सुरक्षा में जहाजों की आवाजाही और स्ट्रेट को बायपास करने के लिए पाइपलाइनों के इस्तेमाल को दिया जा रहा है।

इनपुट: IANS

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