केरल: तबादले से ठीक पहले आबकारी आयुक्त ने खोली विभाग में भ्रष्टाचार की पोल, दो वरिष्ठ अफसरों पर गंभीर आरोप
केरल के आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभाग के पूर्व आयुक्त एस. सांबाशिव राव ने अपने तबादले से कुछ समय पहले राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें दो वरिष्ठ अधिकारियों पर…
केरल के आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभाग के पूर्व आयुक्त एस. सांबाशिव राव ने अपने तबादले से कुछ समय पहले राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत सतर्कता (विजिलेंस) जांच की सिफारिश की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शनिवार को सामने आई इस रिपोर्ट में अधिकारियों पर बार मालिकों से पैसे वसूलने और आय से अधिक संपत्ति रखने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में संयुक्त आबकारी आयुक्त एस. विनोद और उप आयुक्त अजय को नामित किया गया है। इन पर आरोप है कि ये बार मालिकों और शराब की दुकान के लाइसेंसधारियों से पैसे वसूलते थे, आधिकारिक कामों के लिए रिश्वत लेते थे, इनके पास आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति है और ये बेनामी लेनदेन में भी शामिल रहे हैं।
विस्तृत आरोप और मंत्री से संबंध का जिक्र
रिपोर्ट में कहा गया है कि बार मालिकों को अक्सर अपना व्यवसाय खोने के डर से अधिकारियों द्वारा मांगी गई रकम देने के लिए मजबूर किया जाता था। जांच में सहयोग करने वालों को बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ता था, जिससे दूसरे लोग भी आगे आने से डरते थे।
एस. विनोद: रिपोर्ट के मुताबिक, विनोद ने मुवत्तुपुझा के एक बार मालिक से करीबी संबंध बनाए और लाइसेंस संबंधी मामलों में संपर्क सूत्र का काम किया। एक अनुमोदन के लिए उन्होंने बार मालिकों से 50,000 रुपये वसूले। रिपोर्ट में आयुक्त ने विनोद के एक दोस्त के सामने दिए गए उस कबूलनामे का भी जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने माना था कि अलप्पुझा में निरीक्षण यात्राओं के दौरान बार मालिकों ने उन्हें 30,000 रुपये दिए थे।
अजय: उप आयुक्त अजय पर कायमकुलम के कट्टाचिरा स्थित एक बार के प्रबंधन से निरीक्षण यात्राओं और लाइसेंस नवीनीकरण के लिए पैसे लेने का आरोप है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस बार मालिक के आबकारी मंत्री एम. लिजू के साथ करीबी संबंध हैं और अगर उनसे सीधे पूछताछ की जाए तो वह भुगतान की बात का खुलासा कर सकते हैं। इसके अलावा, अजय पर कोट्टायम में तैनाती के दौरान एक रिश्तेदार के नाम पर बार पट्टे पर लेने और खरीदने का भी आरोप है।
जांच और विभागीय सुधार की सिफारिश
पूर्व आयुक्त सांबाशिव राव ने सिफारिश की है कि दोनों अधिकारियों को तत्काल फील्ड असाइनमेंट से हटाया जाए। उन्होंने उनकी संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और आधिकारिक पदों के कथित दुरुपयोग की विस्तृत विजिलेंस जांच की मांग की है।
इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में विभाग के भीतर तबादलों में हुई अनियमितताओं को भी उजागर किया गया है। आरोप है कि आयुक्त की मंजूरी के बिना 32 पोस्टिंग एकतरफा बदल दी गईं। राव ने एक पारदर्शी ऑनलाइन ट्रांसफर प्रणाली लागू करने और संवेदनशील पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच करने की भी मांग की है। यह रिपोर्ट सांबाशिव राव को आबकारी आयुक्त के पद से हटाए जाने के एक दिन बाद सामने आई है।
इनपुट: IANS



