बुधवार, 4 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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दूरसंचार क्षेत्र में बड़ा बदलाव: TRAI ने जारी किए इंटरकनेक्शन के नए नियम, 1 जनवरी 2027 से होंगे लागू

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने देश के टेलीकॉम सेक्टर के लिए इंटरकनेक्शन नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है, जो 1 जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे। इन नए नियमों का मकसद मौजूदा ढांचे…

दूरसंचार क्षेत्र में बड़ा बदलाव: TRAI ने जारी किए इंटरकनेक्शन के नए नियम, 1 जनवरी 2027 से होंगे लागू
(फोटो: IANS)

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने देश के टेलीकॉम सेक्टर के लिए इंटरकनेक्शन नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है, जो 1 जनवरी, 2027 से प्रभावी होंगे। इन नए नियमों का मकसद मौजूदा ढांचे को आधुनिक नेटवर्क टेक्नोलॉजी के हिसाब से ढालना और कॉल कनेक्टिविटी को पहले से बेहतर और आसान बनाना है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्राई ने 'दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026' जारी किए हैं। सरल शब्दों में इंटरकनेक्शन वह व्यवस्था है जिससे अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों (जैसे- एयरटेल, जियो, वोडाफोन-आइडिया) के नेटवर्क आपस में जुड़ते हैं और एक कंपनी का ग्राहक दूसरी कंपनी के ग्राहक को बिना किसी रुकावट के कॉल या मैसेज कर पाता है।

IP आधारित नेटवर्क और LSA-स्तर की कनेक्टिविटी

नए नियमों के तहत सबसे बड़े बदलावों में से एक है पूरी व्यवस्था को IP (इंटरनेट प्रोटोकॉल) आधारित बनाना। भविष्य में स्थापित होने वाले सभी नए इंटरकनेक्शन पॉइंट (POI) पूरी तरह से IP-आधारित होंगे। वहीं, पुरानी TDM तकनीक पर चल रहे मौजूदा पॉइंट्स को भी तीन साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से IP-आधारित सिस्टम में बदलना होगा। ट्राई का मानना है कि इससे बैंडविड्थ का बेहतर इस्तेमाल होगा, कॉल की गुणवत्ता सुधरेगी और लेटेंसी (डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय) कम होगी।

इसके अलावा, अब इंटरकनेक्शन का स्तर भी बदल जाएगा। अभी तक यह लंबी दूरी (LDCA) और छोटी दूरी (SDCA) के चार्जिंग एरिया के स्तर पर होता था, जिसे अब लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (LSA) यानी पूरे टेलीकॉम सर्किल के स्तर पर लाया जाएगा। यह बदलाव भी तीन साल में पूरा होगा। इस कदम से ट्रैफिक रूटिंग की प्रक्रिया सरल होगी और नंबरिंग संसाधनों का प्रबंधन भी कुशल तरीके से हो सकेगा।

नए प्रावधान और वित्तीय नियम

इन संशोधनों में सेवा प्रदाताओं के लिए कई नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं:

  • POI सरेंडर करने का विकल्प: अब तक नियमों में सिर्फ विवाद की स्थिति में इंटरकनेक्शन पॉइंट 'डिस्कनेक्ट' करने का प्रावधान था। अब कंपनियां अपनी व्यावसायिक जरूरतों, जैसे किसी इलाके में ट्रैफिक कम होने या सेवा बंद करने पर, स्वेच्छा से POI 'सरेंडर' कर सकेंगी।
  • बैंक गारंटी में बदलाव: मौजूदा बैंक गारंटी व्यवस्था को बनाए रखते हुए इसके पुनर्मूल्यांकन की अवधि छह महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है।
  • देरी से भुगतान पर ब्याज: इंटरकनेक्शन शुल्क के भुगतान में देरी होने पर लगने वाली ब्याज दर आपसी सहमति से तय होगी, लेकिन यह SBI की एक वर्षीय MCLR दर से 2% से अधिक नहीं हो सकती।
  • वित्तीय दंड: नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से वित्तीय दंड लगाने का ढांचा भी तैयार किया गया है।

ट्राई इन बदलावों की निगरानी के लिए कंपनियों से नियमित रिपोर्टिंग भी करवाएगा, ताकि LDCA से LSA और पुरानी तकनीक से IP-आधारित इंटरकनेक्शन में बदलाव सुचारू रूप से हो सके।

इनपुट: IANS

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