शनिवार, 7 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु: कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग की मंजूरी अब आसान, कलेक्टर की भूमिका खत्म

तमिलनाडु में अब गैर-योजना क्षेत्रों में कृषि भूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए बदलना पहले से आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए मंजूरी देने की प्रक्रिया से जिला कलेक्टरों की…

तमिलनाडु: कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग की मंजूरी अब आसान, कलेक्टर की भूमिका खत्म
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में अब गैर-योजना क्षेत्रों में कृषि भूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए बदलना पहले से आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए मंजूरी देने की प्रक्रिया से जिला कलेक्टरों की भूमिका समाप्त कर दी है। अब यह अधिकार सीधे 'टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशालय' (DTCP) को दे दिया गया है, जिसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाना है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस बदलाव से जमीन मालिकों, बिल्डरों और डेवलपर्स को काफी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें दोहरी मंजूरी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। पहले, किसी भी आवेदक को DTCP से योजना की अनुमति लेने से पहले जिला कलेक्टर से एक पूर्व-सहमति लेनी पड़ती थी, जिसमें अक्सर काफी समय लगता था। अब यह दो-चरणीय व्यवस्था खत्म कर दी गई है।

क्या है नया नियम और प्रक्रिया?

आवास और शहरी विकास विभाग ने 4 नवंबर को एक सरकारी आदेश जारी कर 'तमिलनाडु टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट, 1971' में किए गए संशोधनों को लागू कर दिया है। विभाग के सचिव आर. किर्लोश कुमार ने बताया कि कानून की धारा 47-ए और 9-एफ में संशोधन करके पूर्व-सहमति देने की शक्ति जिला कलेक्टरों से लेकर DTCP को सौंप दी गई है।

हालांकि, प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ ही सरकार ने मौजूदा सुरक्षा उपायों को बरकरार रखा है। DTCP के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आवेदकों को अभी भी संबंधित विभागों से सभी आवश्यक 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) लेने होंगे। जमीन के उपयोग में बदलाव के लिए जरूरी जांच-पड़ताल की शर्तों में कोई ढील नहीं दी गई है।

ऑनलाइन पोर्टल और जरूरी दस्तावेज

नई गाइडलाइंस के तहत, आवेदकों को एक ऑनलाइन 'सिंगल विंडो पोर्टल' के माध्यम से नौ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें मालिकाना हक के दस्तावेज, पट्टा, चिट्टा, पिछले तीन फसली वर्षों के अडंगल रिकॉर्ड, ड्रेनेज प्लान और प्रस्तावित स्थल के 500 मीटर के दायरे में विकास कार्यों को दिखाने वाला टोपोग्राफिकल नक्शा शामिल है। इसके अलावा, एक शपथ-पत्र भी देना होगा कि जमीन में कोई सरकारी 'पोराम्बोके' भूमि या किसी अन्य की संपत्ति शामिल नहीं है।

कम होगा मंजूरी का समय

इस फैसले का निर्माण उद्योग ने स्वागत किया है। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों के मुताबिक, पुरानी व्यवस्था में मंजूरी मिलने में दो से तीन महीने तक लग जाते थे। उन्हें उम्मीद है कि नई प्रक्रिया के तहत यह समय घटकर केवल 15 से 30 दिन रह जाएगा। यह कदम तमिलनाडु सरकार की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसके तहत वह निवेश को आकर्षित करने के लिए भूमि-उपयोग नियमों को आसान बना रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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