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1998 कोयंबटूर धमाके: 5 दोषियों की पैरोल पर तमिलनाडु में राजनीतिक विवाद, भाजपा ने की रद्द करने की मांग

तमिलनाडु में 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पांच दोषियों को 60 दिन की पैरोल दिए जाने पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार…

1998 कोयंबटूर धमाके: 5 दोषियों की पैरोल पर तमिलनाडु में राजनीतिक विवाद, भाजपा ने की रद्द करने की मांग
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पांच दोषियों को 60 दिन की पैरोल दिए जाने पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषियों के प्रति नरम रुख अपना रही है।

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यह पूरा मामला 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से जुड़ा है, जिसमें 58 लोगों की जान चली गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे। ये धमाके तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की एक चुनावी रैली से ठीक पहले हुए थे। प्रतिबंधित संगठन अल-उम्मा पर इन धमाकों को अंजाम देने का आरोप था।

पैरोल पर भाजपा का कड़ा विरोध

तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने सरकार के इस कदम को पीड़ितों के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत या स्वास्थ्य संबंधी कारण इतने बड़े अपराध की गंभीरता से ऊपर नहीं हो सकते। तिरुपति ने कहा, "कोयंबटूर विस्फोट के पीड़ितों के साथ न्याय को राजनीतिक गणनाओं के लिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दोषियों को अपनी पूरी सजा भुगतनी चाहिए।"

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्चतम न्यायालय ने भी इस अपराध को "जघन्य" करार दिया था। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, इस तरह की राहत देने से यह संदेश जाता है कि समाज पर हमला करने वालों के प्रति भी नरमी बरती जा सकती है। उन्होंने सरकार से जन सुरक्षा और पीड़ितों की स्मृति को प्राथमिकता देने की अपील की।

किन दोषियों को मिली पैरोल?

पैरोल पाने वाले पांच दोषियों में मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनप्पा उर्फ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अजम और नवाब खान शामिल हैं। ये सभी कोयंबटूर सेंट्रल जेल में बंद हैं और 25 साल से अधिक की सजा काट चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन्होंने व्यक्तिगत और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पैरोल की अर्जी दी थी। इन्हें पहले भी पैरोल मिल चुकी है, जिसे विधानसभा चुनावों के दौरान अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया था।

वहीं, इस फैसले का बचाव भी किया जा रहा है। टीवीके विधायक वीएमएस मुस्तफा ने दोषियों को पैरोल देने के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री विजय का आभार व्यक्त किया है। सरकार का भी कहना है कि यह राहत याचिका में बताए गए व्यक्तिगत और चिकित्सीय आधारों पर दी गई है।

इनपुट: IANS

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