कोलकाता: दो हमलों के बाद तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने हाईकोर्ट से मांगी सुरक्षा, तत्काल सुनवाई से इनकार
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष पर हुए दो हालिया हमलों के बाद, उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, घोष ने भविष्य…
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष पर हुए दो हालिया हमलों के बाद, उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, घोष ने भविष्य में और हमलों की आशंका जताते हुए एक याचिका दायर की है, जिसे अदालत ने स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन तत्काल सुनवाई की उनकी अपील को खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ ने मामले को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही सुनने का निर्देश दिया है। विधायक के वकील बिश्वरूप भट्टाचार्य ने अदालत में दलील दी थी कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के नाते उनके मुवक्किल पर दो बार हमला हो चुका है, इसलिए मामले पर तुरंत सुनवाई की जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस याचिका को स्वीकार नहीं किया।
विधायक पर कब और कैसे हुए हमले?
कुणाल घोष पर पहला हमला 26 सितंबर को हुगली जिले के उत्तरपाड़ा में हुआ था। जब वह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक रैली में शामिल होने श्रीरामपुर जा रहे थे, तब स्थानीय लोगों ने उनकी गाड़ी का विरोध करते हुए उस पर अंडे फेंके।
इसके ठीक अगले ही दिन, 27 सितंबर को, कोलकाता के बेलियाघाटा में उन्हें फिर से निशाना बनाया गया। विधायक के अनुसार, जब वह अपने घर से निकल रहे थे, तो कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी का पीछा किया, जिनमें से कुछ के पास रिवॉल्वर भी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने हथौड़े से कार की खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की और आगे-पीछे के शीशों पर पत्थर भी फेंके, जिससे गाड़ी को नुकसान पहुंचा। उनका नारकेलडांगा तक पीछा किया गया।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर
तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने दोनों हमलों के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं का हाथ होने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं के बावजूद पुलिस निष्क्रिय बनी रही। वहीं, भाजपा ने इन हमलों में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है।
इनपुट: IANS



