कावेरी जल संकट: त्रिची में सांबा धान की नर्सरियां सूखने की कगार पर, किसानों ने सरकार से लगाई गुहार
तमिलनाडु के त्रिची जिले में हज़ारों किसान अपनी सांबा धान की फसल को लेकर चिंतित हैं। उनकी नर्सरियां पानी की कमी से सूखने का खतरा झेल रही हैं, क्योंकि कावेरी का पानी अभी तक कई खेतों तक नहीं पहुंचा है…
तमिलनाडु के त्रिची जिले में हज़ारों किसान अपनी सांबा धान की फसल को लेकर चिंतित हैं। उनकी नर्सरियां पानी की कमी से सूखने का खतरा झेल रही हैं, क्योंकि कावेरी का पानी अभी तक कई खेतों तक नहीं पहुंचा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने राज्य सरकार से ज़िले की सभी 17 सिंचाई नहरों में तत्काल पानी छोड़ने की मांग की है।
किसानों ने इस उम्मीद में अपनी नर्सरियां तैयार की थीं कि मेट्टूर जलाशय से छोड़ा गया पानी नहरों के माध्यम से समय पर उन तक पहुंच जाएगा। मेट्टूर से पानी 1 सितंबर को छोड़ा गया था, जो रविवार को कराइकल पहुंचा, लेकिन कई इलाकों के किसान अभी भी इंतज़ार कर रहे हैं। इस अनिश्चितता के कारण वे इस मौसम में धान की रोपाई की योजना नहीं बना पा रहे हैं।
जलाशय में पानी की स्थिति और चिंता
इस संकट की एक बड़ी वजह मेट्टूर जलाशय में पानी की उपलब्धता है। मंगलवार शाम को जलाशय का जलस्तर 84.16 फीट था और इसमें 46.228 हजार मिलियन घन फीट पानी का भंडारण था। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जलाशय में पानी की आवक (आगमन) सिर्फ़ 3,867 क्यूसेक थी, जबकि सिंचाई के लिए 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। आवक और निकासी के इस बड़े अंतर ने चिंता बढ़ा दी है कि यह आपूर्ति कितने दिन चल पाएगी। किसानों का अनुमान है कि मौजूदा प्रवाह केवल 25 दिनों तक ही जारी रह सकता है।
किसानों की प्रमुख मांगें और समस्याएं
किसानों ने सरकार से एक वैकल्पिक योजना की भी मांग की है, ताकि नहरों में पानी का बहाव कम होने की स्थिति में फसलों को बचाया जा सके। थिरुप्पराईथुरई के किसानों ने बताया कि कावेरी से पानी छोड़े जाने के तीन सप्ताह बाद भी उनकी सिंचाई करने वाली पुथु अय्यन नहर सूखी पड़ी है। वहीं, कुछ किसानों ने बिजली कटौती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वे सिंचाई के लिए इलेक्ट्रिक पंप भी नहीं चला पा रहे हैं और नर्सरी बचाने के लिए डीज़ल पंपसेट का उपयोग करने हेतु ईंधन पर सब्सिडी की मांग की है।
इसके अलावा, पिछले साल त्रिची में 54,929 हेक्टेयर भूमि पर सांबा धान की खेती हुई थी, लेकिन किसानों के अनुसार, कृषि विभाग ने इस सीजन के लिए अभी तक खेती का लक्ष्य स्पष्ट नहीं किया है। इस बीच, तमिलनाडु अखिल किसान संघ समन्वय समिति के अध्यक्ष पीआर पांडियन ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कावेरी में राज्य का हिस्सा पाने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करने का आग्रह किया है।
सरकारी पक्ष
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि उय्याकोंडन समेत कुछ नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है और उम्मीद है कि बुधवार तक यह खेतों तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि 7 सितंबर को कल्लनाई से पानी छोड़ने के बाद अलग-अलग चरणों में वितरण के कारण इसे खेतों तक पहुंचने में एक-दो दिन और लग सकते हैं।
इनपुट: IANS



