शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

लखनऊ: सुरक्षाकर्मियों की हत्या की बड़ी साजिश नाकाम, पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़े 3 युवक गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने राजधानी लखनऊ में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एटीएस ने पाकिस्तानी आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े तीन…

लखनऊ: सुरक्षाकर्मियों की हत्या की बड़ी साजिश नाकाम, पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़े 3 युवक गिरफ्तार
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने राजधानी लखनऊ में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एटीएस ने पाकिस्तानी आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें पुलिस या सेना के किसी जवान की हत्या करने का काम सौंपा गया था। इस मामले में एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।

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एटीएस ने शुक्रवार को यह कार्रवाई करते हुए आरोपियों के कब्जे से एक विदेशी पिस्तौल और 20 कारतूस बरामद किए। पकड़े गए युवकों की पहचान अमृतसर निवासी 26 वर्षीय गगनदीप सिंह और गुरदासपुर (पंजाब) के 19 वर्षीय रजत कुमार व 21 वर्षीय कृष के रूप में हुई है।

पाकिस्तानी हैंडलर और 'शहजाद भट्टी नेटवर्क'

कानून-व्यवस्था के एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि खुफिया जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान का प्रतिबंधित 'शहजाद भट्टी नेटवर्क' (SBN) भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए पंजाब के युवाओं का इस्तेमाल कर रहा है। शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि वे 'राणा भाई' नाम के एक पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहे थे। गैंगस्टर गगनदीप सिंह और उसके साथी इसी हैंडलर के संपर्क में थे।

टारगेट किलिंग का मिला था जिम्मा

आरोपियों ने बताया कि उन्हें किसी पुलिसकर्मी या सैन्यकर्मी की हत्या कर उसका वीडियो बनाकर हैंडलर को भेजने का काम दिया गया था। इस काम के लिए उन्हें 3 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। जांच के अनुसार, वे 27 अक्टूबर को अमृतसर से चले, दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की आधी रात को लखनऊ पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद उन्होंने रेलवे स्टेशन का एक वीडियो बनाकर राणा भाई को भेजा था।

जांच में सामने आईं अहम बातें

आरोपियों को लखनऊ में एक स्थानीय संपर्क के जरिए हथियार और कारतूस मुहैया कराए गए थे। हैंडलर ने उनके खर्च के लिए दो बार 2,500-2,500 रुपये भी भेजे थे। काम पूरा होने के बाद उन्हें नेपाल भागने में मदद का वादा किया गया था। एटीएस को आरोपियों के फोन से वर्चुअल और विदेशी नंबरों से व्हाट्सएप चैट, वीडियो और कुछ संवेदनशील ठिकानों की रेकी से जुड़ी जानकारी भी मिली है।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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