रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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प्रज्वल रेवन्ना केस: यौन उत्पीड़न मामले की जांच करने वाले SIT के 3 अधिकारियों को मिला केंद्रीय गृह मंत्रालय का सम्मान

पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े चर्चित यौन उत्पीड़न मामले की जांच में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष जांच टीम (SIT) के तीन अधिकारियों को सम्मानित किया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन…

प्रज्वल रेवन्ना केस: यौन उत्पीड़न मामले की जांच करने वाले SIT के 3 अधिकारियों को मिला केंद्रीय गृह मंत्रालय का सम्मान
(फोटो: IANS)

पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े चर्चित यौन उत्पीड़न मामले की जांच में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष जांच टीम (SIT) के तीन अधिकारियों को सम्मानित किया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन अधिकारियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 'मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन' प्रदान किया गया है।

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मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, सम्मानित होने वाले अधिकारियों में इंस्पेक्टर शोभा, सहायक उपनिरीक्षक रत्नम्मा और सीएचसी बालकृष्ण शामिल हैं। ये तीनों उस SIT का हिस्सा थे जिसने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ मामलों की जांच की थी।

जांच की जटिलता और सजा

इस मामले में जांच टीम को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। लीक हुए वीडियो में आरोपी का चेहरा साफ न होने के कारण जांचकर्ताओं ने जन्मचिह्न, तिल और टैटू जैसे शारीरिक निशानों का सहारा लिया। इसके लिए मेडिकल परीक्षण की तस्वीरों और फोरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल कर पहचान सुनिश्चित की गई। टीम ने सैकड़ों वीडियो और हजारों डिजिटल स्क्रीनशॉट का विश्लेषण किया था।

SIT द्वारा पेश किए गए मजबूत सबूतों के आधार पर बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने प्रज्वल रेवन्ना को दोषी ठहराया था। अदालत ने 1 अगस्त 2025 को उन्हें दोषी करार दिया और 2 अगस्त 2025 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(के) और 376(2)(एन) के तहत दी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला साल 2021 में एक 47 वर्षीय घरेलू सहायिका के साथ कथित यौन उत्पीड़न और बार-बार दुष्कर्म से जुड़ा था। आरोप था कि ये घटनाएं परिवार के फार्महाउस और आवास पर हुईं। मामले में आपत्तिजनक वीडियो बनाने और उन्हें प्रसारित करने के भी आरोप थे।

प्रज्वल रेवन्ना पर 11.50 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसमें से 11.25 लाख रुपए पीड़िता को मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया गया। रेवन्ना ने अपनी सजा को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दिसंबर 2025 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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