तेलंगाना: शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने हेतु 'रोहित वेमुला बिल' तीन महीने में होगा तैयार
तेलंगाना के विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कानून बनाया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार ने 'रोहित वेमुला…
तेलंगाना के विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कानून बनाया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार ने 'रोहित वेमुला तेलंगाना विधेयक' का मसौदा तैयार करने के लिए तीन महीने की समय-सीमा तय की है। यह कदम हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोध छात्र रोहित वेमुला की 2016 में हुई आत्महत्या के बाद शैक्षणिक परिसरों में उठे भेदभाव के मुद्दे को संबोधित करने के लिए उठाया जा रहा है।
शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क की अध्यक्षता में वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति की दूसरी बैठक हुई। इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को एक ऐसा व्यापक कानून बनाने का निर्देश दिया जो छात्रों के अधिकारों की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी छात्र को उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।
मसौदा तैयार करने की रणनीति
बैठक के दौरान विधेयक का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया, समिति की संरचना और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि समिति के गठन से लेकर सभी हितधारकों के साथ परामर्श तक, हर चरण निर्धारित समय के भीतर पूरा होना चाहिए और इसमें कोई देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अनुसूचित जाति विकास विभाग (एससीडीडी) को इस प्रक्रिया का नेतृत्व करना चाहिए, जिसमें विधि विभाग, शिक्षा विभाग, गृह विभाग और यूजीसी जैसे अन्य महत्वपूर्ण विभागों व संगठनों को भी शामिल किया जाए।
व्यापक परामर्श और विशेषज्ञता
सरकार की योजना है कि कानून का मसौदा बनाने से पहले समाज के विभिन्न वर्गों से राय ली जाए। इसके लिए छात्र, शिक्षक, कानूनी विशेषज्ञ, नागरिक समाज संगठन और शिक्षाविदों सहित सभी हितधारकों की एक सूची तैयार की जाएगी। उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने कहा कि मसौदा तैयार करते समय छात्रों द्वारा जमीनी स्तर पर सामना की जाने वाली समस्याओं, भेदभाव की घटनाओं और कानून को लागू करने की चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। बैठक में कानूनी और तकनीकी पहलुओं के लिए NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की विशेषज्ञता लेने का भी निर्णय लिया गया।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक वादा
यह कानून कांग्रेस पार्टी के 2023 के विधानसभा चुनाव के वादे का हिस्सा है। पिछले साल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तेलंगाना सरकार से 'रोहित वेमुला एक्ट' लागू करने का आग्रह किया था। गौरतलब है कि हैदराबाद विश्वविद्यालय के 26 वर्षीय शोध छात्र रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
इनपुट: IANS



