मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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तेलंगाना पर अल नीनो का साया: जल संकट और बिजली की बढ़ती मांग से जूझ रहा राज्य

तेलंगाना एक अभूतपूर्व संकट की ओर बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण अल नीनो की वजह से मानसून का कमजोर पड़ना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को चेतावनी दी कि राज्य…

तेलंगाना पर अल नीनो का साया: जल संकट और बिजली की बढ़ती मांग से जूझ रहा राज्य
(फोटो: IANS)

तेलंगाना एक अभूतपूर्व संकट की ओर बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण अल नीनो की वजह से मानसून का कमजोर पड़ना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को चेतावनी दी कि राज्य के जल भंडारों में भारी कमी और बिजली की रिकॉर्ड मांग के चलते आने वाले 9-10 महीने अत्यंत चुनौतीपूर्ण होंगे।

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राज्य में मानसून के दौरान औसत से 23% कम बारिश हुई है, जिसका सीधा असर जलाशयों पर पड़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समय तक जहाँ सभी जलाशयों में कुल मिलाकर 462 TMC पानी होता था, वहीं आज केवल 200 TMC ही उपलब्ध है। यह स्थिति पीने के पानी और सिंचाई, दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

जलाशयों में पानी की भारी कमी

जल संकट की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कृष्णा बेसिन के जलाशयों में पिछले साल की तुलना में 72% कम पानी है। मुख्यमंत्री रेड्डी ने मंत्रियों के साथ स्थिति की समीक्षा के बाद कहा, "किसी भी जलाशय में पीने और खेती की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है।" उन्होंने लोगों से पानी का संरक्षण करने की अपील की है और किसानों से आग्रह किया है कि वे रबी (यासांगी) फसल की बुवाई टाल दें ताकि राज्य के 24,000 गाँवों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

फसलें और बिजली की दोहरी चुनौती

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद, यह आशंका जताई गई है कि खरीफ (वनकलाम) की करीब 10 लाख एकड़ में लगी फसल को नुकसान हो सकता है। फसलों को बचाने के लिए किसान कृषि पंप सेटों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे बिजली की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है।

राज्य में बिजली की मांग सामान्य 15,000 मेगावाट के मुकाबले 20,003 मेगावाट तक पहुंच गई है। यह 5,000 मेगावाट की अतिरिक्त मांग मुख्य रूप से 30 लाख कृषि पंप सेटों के चलने और अक्टूबर में मार्च जैसी गर्मी पड़ने से बढ़ी घरेलू खपत के कारण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार खड़ी फसलों को बचाने के लिए बाजार दरों पर बिजली खरीद रही है। उन्होंने पशुओं के लिए भी चारे और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि बड़े पैमाने पर उनकी मृत्यु को रोका जा सके।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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