तमिलनाडु: शराब की दुकानों पर अब डिजिटल पेमेंट होगा अनिवार्य, ओवरचार्जिंग रोकने के लिए TASMAC का बड़ा कदम
तमिलनाडु में शराब की सरकारी दुकानों पर अब ग्राहकों से तय कीमत से ज़्यादा पैसे वसूलने की शिकायतों पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली गई है। राज्य सरकार के उपक्रम TASMAC (तमिलनाडु राज्य विपणन निगम) ने अपनी…
तमिलनाडु में शराब की सरकारी दुकानों पर अब ग्राहकों से तय कीमत से ज़्यादा पैसे वसूलने की शिकायतों पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली गई है। राज्य सरकार के उपक्रम TASMAC (तमिलनाडु राज्य विपणन निगम) ने अपनी सभी 4,048 खुदरा दुकानों पर चरणबद्ध तरीके से डिजिटल भुगतान को अनिवार्य करने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, यह कदम वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और नकद लेन-देन से जुड़ी गड़बड़ियों को खत्म करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत, 1 नवंबर से 1,000 रुपये से अधिक की शराब खरीदने पर ग्राहकों को डिजिटल माध्यम से ही भुगतान करना होगा। इसके बाद, 1 जनवरी 2027 से यह सीमा घटाकर 500 रुपये कर दी जाएगी, यानी 500 रुपये से ज़्यादा की किसी भी खरीद के लिए डिजिटल पेमेंट ज़रूरी होगा। इस पहल का मुख्य लक्ष्य नकद लेन-देन को कम करना और हर बिक्री का एक स्थायी रिकॉर्ड बनाना है, ताकि किसी भी अनियमितता का आसानी से पता लगाया जा सके।
भुगतान के नए नियम और निर्देश
सोमवार को जारी एक सर्कुलर में, TASMAC के प्रबंध निदेशक के. नंथकुमार ने जिला प्रबंधकों को इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए सभी दुकानों को तैयार करने का निर्देश दिया है। नए नियमों के मुताबिक:
- ग्राहक यूपीआई, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के ज़रिए भुगतान कर सकेंगे।
- सभी भुगतान निगम के अधिकृत बैंक खाते से जुड़ी 'प्वाइंट-ऑफ-सेल' (POS) मशीनों के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
- कर्मचारियों पर ग्राहकों से भुगतान के लिए अपने निजी यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड या बैंक खाते का उपयोग करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
TASMAC ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधिक नकदी के प्रबंधन से जुड़े जोखिम, हिसाब-किताब में संभावित गड़बड़ी और कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए भी डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था
यह फैसला उन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि ग्राहकों से शराब की बोतलों पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। नए निर्देशों में कहा गया है कि कर्मचारियों को हर खरीद के लिए बिल देना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि वसूली गई राशि MRP के बराबर हो।
जिला प्रबंधकों को यह भी ज़िम्मेदारी दी गई है कि वे POS मशीनों के सही संचालन की जाँच करें और कर्मचारियों को डिजिटल भुगतान प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षित करें। सभी दुकानों को 2x3 फीट का एक नोटिस बोर्ड लगाने का भी निर्देश दिया गया है, जिसमें ग्राहकों के लिए भुगतान के नए तरीकों की जानकारी दी गई हो। यदि ग्राहक किसी भी तरह की अनियमितता या अधिक वसूली का सामना करते हैं, तो वे टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800 889 2015 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इनपुट: IANS



