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तमिलनाडु में सोलर-विंड पावर प्रोजेक्ट लगाना होगा आसान, 1 अक्टूबर से शुरू हो रहा नया ऑनलाइन पोर्टल

तमिलनाडु में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में निवेश और नई परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। राज्य सरकार की तमिलनाडु ग्रीन एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TNGEC) 1…

तमिलनाडु में सोलर-विंड पावर प्रोजेक्ट लगाना होगा आसान, 1 अक्टूबर से शुरू हो रहा नया ऑनलाइन पोर्टल
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में निवेश और नई परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। राज्य सरकार की तमिलनाडु ग्रीन एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TNGEC) 1 अक्टूबर से एक नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित बनाना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब राज्य बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहा है और अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहता है।

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इस पोर्टल को लॉन्च करने से पहले, TNGEC ने सोमवार को अक्षय ऊर्जा डेवलपर्स और निवेशकों के साथ एक ऑनलाइन बैठक की। इस बैठक में प्रस्तावित आवेदन प्रक्रिया पर चर्चा की गई और उद्योग जगत के विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए।

कैसी होगी आवेदन की प्रक्रिया?

अधिकारियों के अनुसार, नई ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया दस चरणों में पूरी होगी, जिसमें ग्रिड से जुड़ने (Grid Connectivity) का अनुरोध भी शामिल है। प्रक्रिया की शुरुआत में, आवेदकों को प्रोजेक्ट की बुनियादी जानकारी देने के साथ-साथ आवेदन शुल्क और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। इसके बाद, एक सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (सोलर) 10 दिनों के भीतर प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे। यदि कोई अतिरिक्त जानकारी चाहिए होगी, तो डेवलपर्स को 30 दिनों के भीतर जवाब देना होगा।

एक बार प्रस्ताव स्वीकार हो जाने पर, एक फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद आवेदकों को जमीन से संबंधित दस्तावेज जमा करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने और कनेक्टिविटी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।

उद्योग जगत ने उठाए कुछ सवाल

अक्षय ऊर्जा उत्पादक संघ (Renewable Energy Producers Association) के के. वेंकटाचलम ने इस पोर्टल को प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया को औपचारिक बनाने की दिशा में एक अच्छा कदम बताया। हालांकि, उन्होंने आवेदन में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म को लेकर कुछ चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु विद्युत नियामक आयोग (TNERC) ने पहले से ही ट्रांसमिशन सिस्टम से कनेक्टिविटी के लिए विस्तृत प्रक्रिया और फॉर्मेट जारी किए हैं, लेकिन TNGEC ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह उन्हीं फॉर्मेट का इस्तेमाल करेगा या कोई नया फॉर्मेट लाएगा।

वेंकटाचलम ने कुछ अनिवार्य बताए गए दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की मंजूरी और तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति जैसे दस्तावेजों की मांग की गई है, जबकि अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को आमतौर पर इन शर्तों से छूट मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि आवेदन के समय सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी से यूनिक आईडी की मांग अव्यवहारिक है, क्योंकि यह आईडी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ही मिलती है। TNGEC ने उद्योग से राय तो ली है, लेकिन यह साफ नहीं है कि पोर्टल लॉन्च होने से पहले इन विवादित शर्तों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं।

बैटरी स्टोरेज पर सरकार का जोर

राज्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए, TNGEC ने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी रखा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, निगम का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के अंत तक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के साथ कम से कम 1,500 मेगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ना है। इस स्टोरेज सिस्टम का मकसद सौर ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना और पीक आवर्स (जब बिजली की मांग सबसे ज़्यादा होती है) में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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