तमिलनाडु में जन्म दर घटी, सरकार परिवार कल्याण कार्यक्रम में बांझपन का इलाज जोड़ेगी
घटती जन्म दर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए तमिलनाडु सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने अपने परिवार कल्याण कार्यक्रम…
घटती जन्म दर और बढ़ती बुजुर्ग आबादी की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए तमिलनाडु सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने अपने परिवार कल्याण कार्यक्रम में अब बांझपन के इलाज को भी शामिल करने का फैसला किया है। इस पहल के साथ, तमिलनाडु ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
यह कार्यक्रम परंपरागत रूप से जन्म नियंत्रण और गर्भनिरोधक सेवाओं पर केंद्रित रहा है, लेकिन अब इसका विस्तार उन निःसंतान दंपतियों की मदद के लिए किया जा रहा है जो "अपना परिवार पूरा करना" चाहते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस नीति का उद्देश्य बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करना या बच्चों के जन्म के लिए दबाव बनाना नहीं है। सरकार गर्भनिरोधक और सुरक्षित गर्भपात जैसी सेवाएं पहले की तरह ही जारी रखेगी।
जन्म दर में गिरावट और बुजुर्ग आबादी में वृद्धि
सरकारी आंकड़े एक गंभीर जनसांख्यिकीय बदलाव की ओर इशारा करते हैं। तमिलनाडु में जहां 2020 में 9.39 लाख जन्म दर्ज हुए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर 8.02 लाख रह जाने का अनुमान है। राज्य की कुल प्रजनन दर (TFR) 1.3 पर आ गई है, जो जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए आवश्यक 2.1 के स्तर से काफी कम है।
इसके साथ ही राज्य की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। वर्तमान में, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हैं। अनुमान है कि 2036 तक यह आंकड़ा 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिसका अर्थ होगा कि राज्य का हर पांचवां निवासी एक वरिष्ठ नागरिक होगा।
नई पहल का उद्देश्य और कार्यप्रणाली
विधानसभा में पेश स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के नीतिगत नोट में चेतावनी दी गई है कि प्रजनन दर में लगातार गिरावट से भविष्य में कार्यबल में कमी आ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, विस्तारित कार्यक्रम उन जोड़ों पर केंद्रित होगा जिन्हें गर्भधारण में कठिनाई हो रही है। हाल के एक ऑडिट में यह भी पाया गया कि लगभग 25 से 30 प्रतिशत मातृ मृत्यु अधिक क्रम वाले जन्मों (यानी, कई बच्चों के बाद) के दौरान होती हैं, इसलिए सरकार पहले से संतान वाले जोड़ों को और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करेगी।
इस योजना के तहत, जिला मुख्यालयों के सरकारी अस्पतालों में इंट्रा-यूटेरिन इनसेमिनेशन (IUI) जैसी उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भधारण से पहले की काउंसलिंग दी जाएगी, जिसमें गांव की स्वास्थ्य नर्सें निःसंतान जोड़ों की पहचान करने और उन्हें सही मार्गदर्शन देने में अहम भूमिका निभाएंगी।
इनपुट: IANS



